स्व. युष्मा देवी राठौर की स्मृति में ‘न्योता भोज’, बच्चों के चेहरों पर बिखरी मुस्कान

✍गुरु देव राठौर@गांडाबोरदी। किसी प्रियजन की स्मृति को केवल श्रद्धांजलि तक सीमित रखने के बजाय उसे सेवा और समाजोपयोगी कार्यों से जोड़ना उस स्मृति को जीवंत बनाए रखने का सुंदर माध्यम है। इसी भावना के साथ शासकीय प्राथमिक शाला गांडाबोरदी के प्रधान पाठक गुरुदेव राठौर ने अपनी धर्मपत्नी स्वर्गीय श्रीमती युष्मा देवी राठौर की सातवीं पुण्यतिथि पर विद्यालय के बच्चों के लिए ‘न्योता भोज’ का आयोजन किया।
सोमवार, 31 अगस्त 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम में शासकीय प्राथमिक शाला एवं माध्यमिक शाला गांडाबोरदी के विद्यार्थियों को प्रेमपूर्वक भोजन कराया गया। बच्चों को चावल, दाल, हरी सब्जी, टमाटर की चटनी और मीठी कचौड़ी परोसी गई। भोजन के दौरान बच्चों के चेहरों पर दिखाई देती खुशी ने इस आयोजन को आत्मीय बना दिया।
स्मृति को सेवा से जोड़ा
स्वर्गीय युष्मा देवी राठौर की स्मृति को और अधिक सार्थक बनाते हुए गुरुदेव राठौर की ओर से शाला के सभी बच्चों को भेंट स्वरूप स्कूल बैग भी प्रदान किए गए। यह पहल केवल उपयोगी सामग्री का वितरण नहीं, बल्कि बच्चों की शिक्षा के प्रति प्रोत्साहन और दिवंगत आत्मा की स्मृति को शिक्षा सेवा से जोड़ने का भावपूर्ण प्रयास रही।
कार्यक्रम में संकुल प्राचार्य जे.आर. पटेल, संकुल समन्वयक कमलेश्वर देवांगन, माध्यमिक शाला बड़े देवगांव के प्रधान पाठक संतोष मौरे, प्राथमिक शाला गांडाबोरदी के प्रधान पाठक कामता प्रसाद पटेल,टेकराम राठौर, भुनेश्वर साहू, प्राथमिक शाला बड़े देवगांव की प्रधान पाठक श्रीमती गीता बरेठ, सहायक शिक्षिका श्रीमती मंजू पटेल सहित शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।
इसके अलावा प्राथमिक शाला गांडाबोरदी की शिक्षिका श्रीमती ममता डनसेना, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती पूजा भारद्वाज,सहायिका श्रीमती ममता भारद्वाज,शाला विकास समिति के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्षगण तथा मध्यान्ह भोजन महिला समूह के अध्यक्ष,सचिव और सदस्यगण भी कार्यक्रम में सहभागी बने।
श्रद्धांजलि का बना संवेदनशील माध्यम

पुण्यतिथि पर आयोजित यह न्योता भोज उस भाव को सामने लाता है कि अपनों की स्मृतियां समय के साथ धुंधली नहीं होतीं,बल्कि सेवा,शिक्षा और परोपकार के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के जीवन में अपना स्थान बना सकती हैं। बच्चों के साथ भोजन साझा करना और उन्हें शिक्षा में उपयोगी स्कूल बैग भेंट करना स्वर्गीय युष्मा देवी राठौर की स्मृति को विनम्र और मानवीय श्रद्धांजलि देने का माध्यम बना।
स्मृति में किया गया यह छोटा-सा प्रयास बच्चों के लिए खुशी और प्रोत्साहन का कारण बना, वहीं दिवंगत आत्मा के प्रति श्रद्धा को सेवा के भाव से जोड़ गया।



