
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नरसंहार मामले में आज, 31 अगस्त 2026, NIA की विशेष अदालत अपना बहुप्रतीक्षित फैसला सुना सकती है। मामले की अंतिम सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था और 31 अगस्त की तारीख निर्धारित की थी।
मामले की सुनवाई के दौरान 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। वर्तमान में इस प्रकरण में 10 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चल रही है। अभियोजन और बचाव पक्ष की अंतिम दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने निर्णय सुरक्षित रखा था।
सालों बाद फैसले की घड़ी…
25 मई 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में माओवादियों ने कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर हमला किया था। इस हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष शहीद नंदकुमार पटेल,शहीद महेंद्र कर्मा,शहीद विद्याचरण शुक्ल शहीद दिनेश पटेल और उदय मुदलियार सहित 29 लोगों की मौत हुई थी। घटना के बाद मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने संभाली थी।
अगस्त में तीन दिनों तक चली अंतिम बहस के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित किया था। अब आज होने वाले निर्णय को लेकर राजनीतिक, कानूनी और सामाजिक स्तर पर व्यापक नजरें टिकी हुई हैं।
फैसला कब सुनाया जाएगा, इसे लेकर आधिकारिक समय की पुष्टि उपलब्ध नहीं है, हालांकि दोपहर तक निर्णय आने की संभावना जताई जा रही है। फैसला आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि अदालत उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर क्या निष्कर्ष निकालती है।
झीरम घाटी मामले को छत्तीसगढ़ के सबसे गंभीर राजनीतिक हिंसा प्रकरणों में गिना जाता है। इसलिए आज आने वाला न्यायालयीन निर्णय केवल कानूनी प्रक्रिया का अगला पड़ाव नहीं, बल्कि वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे पीड़ित परिवारों और प्रदेश के लिए भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।




