श्रीमद्भागवत कथा के लिए क्षेत्र से राजस्थान पहुंचेगी रसिकों की टोली

श्रीजड़खोर गोधाम में 11 से 20 अक्टूबर तक होगा दस दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा-गीता-अमृत महोत्सव
खरसिया ।श्रीमद्भागवत की अमृतमयी कथा के श्रवण की लालसा भक्तों को दूर-दूर तक खींच ले जाती है। इसी आध्यात्मिक आकर्षण से क्षेत्र के श्रीमद्भागवत प्रेमी श्रद्धालुओं की एक टोली राजस्थान के श्रीजड़खोर गोधाम पहुंचने की तैयारी में है, जहां शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर 11 से 20 अक्टूबर 2026 तक दस दिवसीय ‘श्रीमद्भागवत गीता-अमृत महोत्सव’ का आयोजन किया जाएगा।
आयोजन की जानकारी के अनुसार, श्रीजड़खोर गोधाम, बाया-पहलवाड़ा/सेज, पोस्ट-गुहाना, जिला डीग, राजस्थान में होने वाले इस धार्मिक आयोजन में प्रतिदिन श्रीमद्भागवत कथा का रस प्रवाहित होगा। कथा का समय प्रातः 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक निर्धारित किया गया है। आयोजन में श्रीसुदर्शन-सहस्रकुण्डीय यज्ञ भी प्रस्तावित है।
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कथा का वाचन स्वामी श्रीराजेंद्र दास देवाचार्य जी महाराज (श्रीराधा-वृन्दावन धाम) के श्रीमुख से होगा। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, भक्ति, ज्ञान और जीवन-दर्शन से जुड़ी कथा का श्रवण करने देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
क्षेत्र से राजस्थान तक—कथा-रस की एक आध्यात्मिक यात्रा
क्षेत्र में श्रीमद्भागवत कथा के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था रही है। कथा के श्रवण को केवल धार्मिक अनुष्ठान न मानकर आत्मिक अनुभूति का अवसर मानने वाले रसिक भक्त इस यात्रा को विशेष भाव से देख रहे हैं।
कथा-प्रेमियों की यह टोली राजस्थान की धरती पर पहुंचकर दस दिनों तक भागवत के अमृत-वचनों का श्रवण करेगी। उनके लिए यह यात्रा पर्यटन नहीं, बल्कि श्रवण, साधना और सत्संग की आध्यात्मिक यात्रा होगी।
शारदीय नवरात्र की पावन बेला में होने वाला यह आयोजन भक्ति और अध्यात्म के वातावरण को और गहरा करेगा। चपले क्षेत्र के श्रद्धालुओं के लिए यह अवसर भगवान श्रीकृष्ण की कथा के माध्यम से अपने भीतर की आस्था को और दृढ़ करने का माध्यम बनेगा।
कथा की दूरी भले क्षेत्र से 1255किलो मीटर, लेकिन भक्ति के लिए दूरी कभी बाधा नहीं होती। जहां श्रीमद्भागवत कथा का रस प्रवाहित होता है,वहां रसिक हृदय स्वयं खिंचा चला जाता है।



