
खरसिया। शिक्षक दिवस के अवसर पर खरसिया विधायक उमेश नंदकुमार पटेल ने गुरुजनों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की उस परंपरा को आगे बढ़ाया,जिसकी नींव उनके पिता शहीद नंदकुमार पटेल ने वर्षों पहले खरसिया की धरती पर रखी थी। ग्राम मदनपुर स्थित कांग्रेस कार्यालय में आयोजित समारोह में विधानसभा क्षेत्र के सेवानिवृत्त शिक्षकों का सम्मान किया गया। इस दौरान विधायक ने सेवानिवृत शिक्षकों के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लिया,जिससे समारोह का वातावरण आत्मीयता और भावुकता से भर उठा।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती, भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, शहीद नंदकुमार पटेल एवं शहीद दिनेश पटेल के चित्र पर पूजा-अर्चना और माल्यार्पण के साथ हुआ। इसके पश्चात विधायक उमेश पटेल ने उपस्थित सेवानिवृत्त शिक्षकों को माल्यार्पण कर तिलक लगाया तथा श्रीफल और शॉल भेंटकर सम्मानित किया। वरिष्ठ गुरुजनों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेने का उनका भाव समारोह की सबसे मार्मिक तस्वीरों में शामिल रहा।
पिता ने जो परंपरा शुरू की,उसे निभाना जीवन का संकल्प बना

समारोह को संबोधित करते हुए विधायक उमेश पटेल ने अपने पिता शहीद नंदकुमार पटेल की स्मृतियों को साझा किया। उन्होंने कहा कि करीब दो दशक पहले उनके बाबूजी ने मदनपुर स्थित कांग्रेस कार्यालय से शिक्षक दिवस पर सेवानिवृत्त शिक्षकों के सम्मान की परंपरा शुरू की थी। यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि गुरुजनों के प्रति समाज की सामूहिक कृतज्ञता की अभिव्यक्ति बन गया।

उन्होंने बताया कि शहीद नंदकुमार पटेल के निधन के बाद जब पहला शिक्षक दिवस आया, तब कांग्रेस परिवार के सामने यह प्रश्न था कि वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को आगे कैसे बढ़ाया जाए। कार्यकर्ताओं के मन में यह संकोच भी था कि उमेश पटेल से इस संबंध में कैसे बात की जाए। बाद में जब उनसे कार्यक्रम को लेकर चर्चा हुई तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि बाबूजी ने जिस परंपरा को शुरू किया है, उसे रुकने नहीं दिया जाएगा।
विधायक उमेश पटेल ने कहा कि उन्होंने उसी समय संकल्प लिया था कि जब तक जीवन है, उनके पिता द्वारा प्रारंभ किया गया शिक्षक सम्मान समारोह निरंतर जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि खरसिया से प्रारंभ हुई यह परंपरा आज छत्तीसगढ़ के अनेक हिस्सों में शिक्षक सम्मान के आयोजनों के रूप में दिखाई देती है, जो उनके लिए गर्व और संतोष का विषय है।
स्व. प्रोफेसर मेदनी नायक की सीख को किया याद
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इस अवसर पर विधायक उमेश पटेल ने कुसमुरा निवासी स्वर्गीय प्रोफेसर मेदनी नायक को भी श्रद्धापूर्वक याद किया और उनसे जुड़ी सीख का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जीवन में कुछ व्यक्तित्व अपने पीछे केवल स्मृतियां नहीं छोड़ते, बल्कि ऐसी विचार-परंपरा छोड़ जाते हैं, जो आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती रहती है। शिक्षक सम्मान की भावना भी ऐसी ही विरासत है, जिसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
‘पारस पत्थर और शिक्षक दोनों बराबर’
शिक्षकों के महत्व को रेखांकित करते हुए विधायक उमेश पटेल ने कहा कि “पारस पत्थर और शिक्षक दोनों बराबर हैं।” जिस प्रकार पारस पत्थर किसी साधारण धातु को स्पर्श कर उसे सोने में बदल देता है, उसी प्रकार शिक्षक का स्पर्श, शिक्षा और संस्कार एक सामान्य विद्यार्थी के व्यक्तित्व को ज्ञान, विवेक और चरित्र से समृद्ध कर देता है।

उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल किताबों का ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह विद्यार्थी के व्यक्तित्व की बुनियाद तैयार करता है। उसके संस्कारों को दिशा देता है, उसकी प्रतिभा को पहचानता है और उसके भविष्य को आकार देता है। समाज और राष्ट्र के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका इसलिए विशिष्ट है कि उनके द्वारा तैयार की गई पीढ़ियां आगे चलकर समाज की दिशा तय करती हैं।

उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति के साथ शिक्षक का सामाजिक दायित्व समाप्त नहीं होता। उनके पास संचित अनुभव, ज्ञान और जीवन-दृष्टि समाज की अमूल्य धरोहर है, जिसका लाभ नई पीढ़ी को मिलना चाहिए।
गुरुजनों का सम्मान,समाज की अपनी जड़ों का सम्मान
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक दिवस महज कैलेंडर की एक तारीख नहीं,बल्कि उस ऋण को स्मरण करने का अवसर है जिसे कोई समाज कभी पूरी तरह चुका नहीं सकता। सेवानिवृत्त शिक्षकों ने अपने सेवाकाल में हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा और संस्कार देकर समाज की नींव मजबूत की है। ऐसे गुरुजनों का सम्मान केवल उनका सम्मान नहीं,बल्कि ज्ञान,अनुशासन, संस्कार और मानवीय मूल्यों का सम्मान है।
समारोह के दौरान जब विधायक उमेश पटेल ने सेवानिवृत शिक्षकों का आशीर्वाद लिया तो वातावरण में आत्मीयता की एक अलग ही अनुभूति दिखाई दी। राजनीतिक पद और सार्वजनिक जीवन की व्यस्तताओं से परे गुरु के सामने शिष्य भाव में झुकता यह दृश्य शिक्षक सम्मान के मूल भाव को जीवंत करता नजर आया।
कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता रहे मौजूद

कार्यक्रम में कांग्रेस,महिला कांग्रेस,युवा कांग्रेस सहित कांग्रेस के विभिन्न पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
शिक्षक दिवस पर आयोजित यह समारोह केवल सम्मान समारोह बनकर नहीं रहा, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा, स्मृति और संकल्प के उस भाव का साक्षी बना,जिसमें एक पीढ़ी अपने गुरुजनों को नमन करती है और अगली पीढ़ी के लिए सम्मान की विरासत छोड़ जाती है।



