शिक्षक दिवस पर गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता का भाव, देहाती ने कहा—“गुरु का ऋण शब्दों में चुकाया नहीं जा सकता”

खरसिया। शिक्षक दिवस केवल एक औपचारिक अवसर नहीं,बल्कि उन महान व्यक्तित्वों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का दिन है,जिन्होंने अ से ज्ञ तक के शब्दों को कहाँ किस रुप में जोड़ने का ज्ञान के दीप से जीवन की राहों को आलोकित किया।

इसी भावभूमि के साथ अखिल भारतीय अघरिया समाज इकाई खरसिया के केंद्रीय प्रतिनिधि, अधिवक्ता एवं पत्रकार गोपाल कृष्ण नायक ‘देहाती’ ने शिक्षक दिवस पर अपने समस्त गुरुजनों के प्रति हृदय की गहराइयों से आभार एवं नमन व्यक्त किया।

अपने भावपूर्ण संदेश में गोपाल कृष्ण नायक “देहाती” ने कहा कि शिक्षक केवल अक्षरों का ज्ञान देने वाले व्यक्ति नहीं होते,बल्कि वे जीवन को समझने की दृष्टि,परिस्थितियों से संघर्ष करने का साहस और सही मार्ग चुनने का विवेक प्रदान करते हैं। मनुष्य की जीवन-यात्रा में अनेक मोड़ आते हैं,अनेक पथ सामने होते हैं और कई बार निर्णय की घड़ी भी कठिन होती है। ऐसे समय में गुरुजनों से प्राप्त शिक्षा,संस्कार और अनुभव ही अंतर्मन में प्रकाश बनकर सही दिशा दिखाते हैं।

उन्होंने कहा कि जीवन में मिले गुरुजन किसी एक पाठशाला या किसी एक विषय तक सीमित नहीं होते। किसी ने शिक्षा का मार्ग दिखाया,किसी ने धर्म और संस्कारों का बोध कराया,किसी ने परिवारिक,सामाजिक जीवन की जिम्मेदारियां समझाईं,तो किसी ने राजनीतिक एवं सार्वजनिक जीवन में आचरण और अनुशासन का महत्व सिखाया। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में किसी न किसी गुरु का मार्गदर्शन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से साथ चलता है।

गोपाल कृष्ण नायक “देहाती” ने कहा कि गुरु का ऋण ऐसा ऋण है,जिसे शब्दों में चुकाया नहीं जा सकता। गुरु स्वयं दीपक की तरह जलकर शिष्य के जीवन को प्रकाश देते हैं। उनका दिया हुआ ज्ञान समय के साथ समाप्त नहीं होता,बल्कि अनुभवों की धूप-छांव में और अधिक गहरा तथा सार्थक होता जाता है। गुरु की सीख जीवन के उस संबल की तरह होती है,जो कठिन परिस्थितियों में भी मनुष्य को टूटने नहीं देती।
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि आज शिक्षक दिवस के अवसर पर वे अपने जीवन को दिशा देने वाले सभी गुरुजनों को सादर नमन करते हैं और उन सभी के प्रति हृदय से आभार,कृतज्ञता एवं धन्यवाद व्यक्त करते हैं, जिनकी शिक्षा, संस्कार,अनुशासन और मार्गदर्शन ने जीवन की यात्रा को सहज बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि मनुष्य भले ही जीवन में कितनी भी ऊंचाइयां प्राप्त कर ले, लेकिन उसकी सफलता की नींव में गुरुजनों की सीख,स्नेह आशीर्वाद और संस्कार सदैव विद्यमान रहते हैं। गुरु वह स्मृति नहीं,जो समय के साथ धुंधली हो जाए; गुरु वह प्रकाश हैं, जिसकी रोशनी जीवन की अंतिम यात्रा तक साथ चलती है।
गोपाल कृष्ण नायक ‘देहाती’ ने अपने संदेश का समापन करते हुए कहा—

“जिन गुरुजनों ने जीवन के अनगिनत पथों पर चलना सिखाया, अंधकार में प्रकाश दिखाया,सही और गलत का भेद समझाया तथा जीवन को सहज और सार्थक बनाने का ज्ञान दिया—उन सभी गुरुजनों को शत-शत नमन। आपके दिए संस्कार ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी हैं और आपका आशीर्वाद ही जीवन की सबसे अमूल्य धरोहर।”

— आपका अपना
✍गोपाल कृष्ण नायक ‘देहाती’




