बम-बम भोले के जयकारों से गूंजी कश्मीर घाटी: कड़ी सुरक्षा के बीच शुरू हुई श्री अमरनाथ यात्रा,दोनों मार्गों पर उमड़ा आस्था का सैलाब…

श्रीनगर/जम्मू। बाबा बर्फानी के पवित्र हिमलिंग के दर्शन की अभिलाषा लिए देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं के साथ वार्षिक श्री अमरनाथ यात्रा का शुभारंभ हो गया है। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने जम्मू स्थित भगवती नगर बेस कैंप से प्रथम जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के गगनभेदी उद्घोषों के बीच श्रद्धालुओं का कारवां पवित्र गुफा की ओर प्रस्थान कर चुका है।

यात्रा इस वर्ष भी दो पारंपरिक मार्गों से संचालित की जा रही है। बालटाल मार्ग लगभग 14 किलोमीटर लंबा है, जो अपेक्षाकृत छोटा लेकिन अत्यंत कठिन और खड़ी चढ़ाई वाला रास्ता माना जाता है। वहीं पहलगाम मार्ग लगभग 46 से 48 किलोमीटर लंबा पारंपरिक रास्ता है, जो चंदनवाड़ी, पिस्सू टॉप, शेषनाग और पंचतरणी होते हुए पवित्र गुफा तक पहुंचता है।
यात्रा के लिए श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड द्वारा पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। केवल 13 से 70 वर्ष आयु वर्ग के शारीरिक रूप से स्वस्थ श्रद्धालुओं को यात्रा की अनुमति है। छह सप्ताह से अधिक गर्भवती महिलाओं को यात्रा की अनुमति नहीं दी जाती। पंजीकरण के लिए अधिकृत चिकित्सक द्वारा जारी कम्पल्सरी हेल्थ सर्टिफिकेट (CHC) आवश्यक है। श्रद्धालु ऑनलाइन अथवा देशभर की अधिकृत बैंक शाखाओं के माध्यम से पंजीकरण करा सकते हैं। जिन यात्रियों ने अग्रिम पंजीकरण नहीं कराया है, उनके लिए जम्मू तथा श्रीनगर-पहलगाम क्षेत्र में ऑन-द-स्पॉट एवं तत्काल पंजीकरण की व्यवस्था भी की गई है।
सुरक्षा व्यवस्था को इस वर्ष और अधिक तकनीकी बनाया गया है। यात्रा मार्ग पर बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा तैनात किया गया है तथा प्रत्येक यात्री के लिए RFID ट्रैकिंग अनिवार्य की गई है, जिससे यात्रा के दौरान उनकी गतिविधियों और सुरक्षा पर लगातार निगरानी रखी जा सके। प्रशासन ने पहाड़ी क्षेत्रों में बदलते मौसम और संभावित वर्षा को देखते हुए श्रद्धालुओं से केवल अधिकृत मौसम एवं प्रशासनिक सलाह का पालन करने की अपील की है।
यात्रा की एक विशेष पहचान सेवा और समर्पण की भावना भी है। पवित्र मार्ग के विभिन्न पड़ावों पर देशभर से आई स्वयंसेवी संस्थाओं और धार्मिक संगठनों द्वारा श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क लंगर,आवास,चिकित्सा सहायता और आपातकालीन सेवाओं की व्यापक व्यवस्था की गई है। यही सेवा-भाव इस कठिन तीर्थयात्रा को केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन और मानवीय सहयोग का अद्भुत संगम बनाता है।

हर-हर महादेव। बम-बम भोले। 🙏




