सोड़का(खरसिया)के बहुचर्चित वृद्ध हत्या कांड में न्याय की निर्णायक दस्तक…

मकान विवाद में 62 वर्षीय वृद्ध की हत्या करने वाले दो सगे नातियों को आजीवन कारावास, रायगढ़ पुलिस की सशक्त विवेचना और प्रभावी पैरवी से मिला न्याय
खरसिया। न्याय भले ही समय ले, लेकिन जब ठोस साक्ष्य और निष्पक्ष विवेचना उसके साथ खड़ी हो,तो अपराध अंततः कानून के कठघरे में ही पहुंचता है। खरसिया के बहुचर्चित वृद्ध हत्या कांड में ऐसा ही एक महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है,जहां पारिवारिक संपत्ति विवाद के बीच अपने ही नातियों के हाथों जीवन गंवाने वाले 62 वर्षीय गेंदलाल डनसेना को आखिरकार न्याय मिला। माननीय न्यायालय ने दोनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि रिश्तों की आड़ में किए गए जघन्य अपराध भी कानून की कठोर दृष्टि से बच नहीं सकते।
रायगढ़ पुलिस की मजबूत विवेचना और अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश, खरसिया की अदालत ने सत्र प्रकरण क्रमांक 01/2026 में थाना खरसिया के अपराध क्रमांक 684/2022 के आरोपी ओमप्रकाश डनसेना उर्फ गोलू और कार्तिक डनसेना को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 302/34, 427 एवं 449 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास से दंडित किया।
जब संपत्ति का विवाद रिश्तों पर भारी पड़ गया
अभियोजन के अनुसार ग्राम सोण्डका निवासी गेंदलाल डनसेना का अपने पुश्तैनी मकान और जमीन को लेकर लंबे समय से पारिवारिक विवाद चल रहा था। उन्होंने अपनी बहन को रहने के लिए घर में स्थान दिया था, जहां उनके दोनों नाती भी रहते थे। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान निर्माण और संपत्ति के अधिकार को लेकर विवाद लगातार गहराता गया और आखिरकार पारिवारिक मतभेद हिंसा की भयावह परिणति तक पहुंच गया।
25 दिसंबर 2022 को आरोपियों ने मृतक के छोटे भाई के घर में घुसकर मारपीट और तोड़-फोड़ की। अगले दिन 26 दिसंबर को पारिवारिक बैठक के दौरान विवाद ने उग्र रूप ले लिया। जान बचाने के लिए वृद्ध गेंदलाल डनसेना कमरे में जा छिपे,लेकिन आरोपियों ने गैस सिलेंडर से दरवाजा तोड़ दिया और टंगिया,फावड़ा तथा डंडे से उन पर निर्मम हमला कर उनकी हत्या कर दी। यह घटना केवल एक हत्या नहीं थी, बल्कि रिश्तों के विश्वास के टूटने की दर्दनाक तस्वीर भी थी।
वैज्ञानिक विवेचना ने मजबूत किया न्याय का आधार

घटना की सूचना मिलते ही तत्कालीन थाना प्रभारी खरसिया उप निरीक्षक नंद किशोर गौतम (वर्तमान निरीक्षक, जिला राजनांदगांव) और चौकी प्रभारी जोबी एएसआई लक्ष्मी नारायण राठौर पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। एक आरोपी कार्तिक डनसेना को घटनास्थल से ही हिरासत में ले लिया गया, जबकि दूसरे आरोपी ओमप्रकाश डनसेना को अगले दिन मुखबिर की सूचना पर नावापारा रोड से गिरफ्तार किया गया।
पूछ-ताछ के दौरान आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त टंगिया, फावड़ा, डंडा, गैस सिलेंडर तथा घटना के समय पहने गए कपड़े जब्त किए गए। विवेचना के दौरान संकलित भौतिक और मौखिक साक्ष्यों को वैज्ञानिक तरीके से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। सुदृढ़ साक्ष्य और प्रभावी अभियोजन के कारण न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषसिद्ध मानते हुए आजीवन कारावास का दंड सुनाया।
रायगढ़ पुलिस की विवेचना पर फिर लगी न्यायालय की मुहर
यह फैसला केवल एक मामले का निष्कर्ष नहीं,बल्कि रायगढ़ पुलिस की गुणवत्तापूर्ण विवेचना,साक्ष्य संकलन और अभियोजन के समन्वय की प्रभावशीलता का प्रमाण भी है। गंभीर अपराधों में लगातार मिल रही कठोर सजाएं यह दर्शाती हैं कि वैज्ञानिक जांच और मजबूत साक्ष्य न्याय की सबसे बड़ी शक्ति हैं।
एसएसपी का संदेश: अपराधी किसी भी कीमत पर नहीं बचेंगे
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने कहा कि हत्या जैसे जघन्य अपराधों में दोषियों को कठोर दंड दिलाना रायगढ़ पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक विवेचना, ठोस साक्ष्य संकलन और अभियोजन के प्रभावी समन्वय का परिणाम है कि न्यायालय लगातार गंभीर मामलों में दोषियों को कड़ी सजा सुना रहा है। यह निर्णय समाज में कानून के प्रति विश्वास को मजबूत करने के साथ-साथ अपराधियों के लिए स्पष्ट चेतावनी है कि अपराध करने वाला व्यक्ति कानून की पकड़ से बच नहीं सकता।
न्याय का संदेश
यह फैसला केवल दो दोषियों को मिली सजा नहीं,बल्कि उस सिद्धांत की पुनर्पुष्टि है कि न्याय देर से मिल सकता है,लेकिन यदि विवेचना निष्पक्ष,साक्ष्य मजबूत और कानून अपना काम पूरी निष्ठा से करे, तो अपराध का अंत दंड और न्याय की जीत के साथ ही होता है।



