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महाशिवरात्रि विशेष खरसिया बरगढ़ खोला के सिद्धेश्वरनाथ मंदिर मे शिवरात्रि पर 03 दिनों का मेला…

खरसिया। आज हम आपको रायगढ़ जिले के ऐसे स्थान के विषय में बताने जा रहे हैं जिसकी चर्चा जिले के अलावा प्रदेश स्तर तक होती है। खरसिया विधानसभा के अंतर्गत खरसिया-सक्ति मार्ग पर बरगढ़ ग्राम में स्थित सिद्धेश्वर नाथ धाम मंदिर को कौन नहीं जानता है। रायगढ़ से बरगढ़ महज 45 किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है। यहाँ पर प्रसिद्ध शिवमन्दिर है जो बहुत प्राचीनकाल से है। प्राकृतिक दृश्य से मन को अगाध शांति देने वाला इस मंदिर में विराजमान भोलेनाथ की सत्यता की गाथा हर कोई गाता है।

बरगढ़ स्थित मंदिर का प्रांगण व प्राकृतिक वातावरण अत्यंत ही मनोरम व शांत है। तीन तरफ से पहाड़ों की सुंदरता और मंदिर के किनारे कलकल करती बोराई नाला यहां के दृश्य को विहंगम व सुंदर बनाती हैं। मंदिर प्रांगण में भगवान शिव जी के साथ-साथ माँ आदिशक्ति देवी दुर्गा, भगवान श्रीराम, भैया लक्ष्मण, सीता मैया समेत भगवान सांई नाथ महाराज का भी मंदिर है। बरगढ़ धाम का सिद्धेश्वर नाथ मंदिर बेहद प्रसिद्ध व मान्यताओं से परिपूर्ण है। वर्षों से हमारे दादा के दादा जमाने से पुजा अर्चना करते आ रहे हैं।

बताया जाता है कि मंदिर में जाने से वहाँ के वातावरण में जो शांति मिलती है उसका अनुभव बेहद सुखद है। मन्दिर प्रांगण में जाने से मन को शांति मिलती है शरीर में ऊर्जा का संचार होता है। मन्दिर के घंटियों की बजने की आवाज से भटका हुआ मन भी एकत्रित हो जाता है। इस मंदिर में हर साल फरवरी-मार्च के महीने में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर तीन दिवसीय मेला लगता है। यहाँ का मेला अपने क्षेत्र में खूब प्रसिद्ध है।

प्रतिवर्ष बरगढ़ खोला व आसपास के क्षेत्र के निवासियों को महाशिवरात्रि मेले का इंतजार रहता है क्योंकि इस क्षेत्र में एक मात्र यही एक मेला होता है जिसमें सभी लोग भगवान के दर्शन करने के साथ-साथ घूमने फिरने भी आते हैं और मेले का आनंद लेते हैं। सिद्धेश्वर नाथ के दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग कर नापते हुए आते हैं और अपने दुख को दूर करने के लिए भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना करते हैं। पूरे जिले में बरगढ़ के सिद्धेश्वरनाथ मन्दिर की गूंज उठती है। महाशिवरात्रि के तीन दिन तक लोगों का मन्दिर में पैर रखना मुश्किल हो जाता है। यहाँ तीन दिन का मेला लगता है और रात में बंद हो जाता है पर मेला में लोग आनंद के साथ-साथ भगवान शिव जी का दर्शन भी कर लेते है।

यहां की मान्यता है और लोग कहते भी है कि जब लोग भगवान भोलेनाथ पर जल चढ़ाते है तब शिवजी जलमग्न होकर डुबने लगते है और मंदिर प्रांगण से उठ मंदिर समीप पहाड़ की चोटी पर जाकर विराजमान हो जाते हैं फिर लोग मंदिर से दर्शन करने पहाड़ की चोटी पर जाते हैं। ऐसा यहाँ का मानना है और लोग पहाड़ पर चढ़ते भी है। महाशिवरात्रि के मेला के बाद ये माहौल यही खत्म नहीं होता है जैसे ही सावन महीना आता है यहाँ महा शिवरात्रि मेला के आधे दुकान इस सावन महीने में लगने लगते है और पूरे सावन महीने तक महादेव के घन्टी को सुनते है। सावन में भी मेला की तरह लोग प्रत्येक सोमवार को आते हैं और भगवान सिद्धेश्वर नाथ की पूजा अर्चना करते और दुकानों से खरीदी कर खुशी मनाते हैं।

सावन महीने के आखरी सोमवार को भक्तों की भीड़ उमड़ती है। आखिरी सोमवार को बहुत से लोग दूर – दूर से डीजे बजाते नाचते-कूदते भगवान शिव जी की नगरी में बरगढ़ में पधारते हैं और पूजा अर्चना करते है साथ ही साथ खीर-पूड़ी बांटने का भी आयोजन करते हैं। श्री सिद्धेश्वर नाथ जी की महिमा का गुणगान करे वो कम है। यहां के क्षेत्रवासियों का मानना है कि जब लोग मुसीबत में हो तो मंदीर में सिद्धेश्वर नाथ के पास जाते हैं। जब खेती के लिए पानी की जरूरत हो तब सावन महीने में रुद्राभिषेक कर भगवान शिवजी से बारिश की मांग करते है। बरगढ़ खोला अंचल में यह मान्यता है कि बरगढ़ स्थित सिद्धेश्वर नाथ भगवान भोलेनाथ से सच्चे मन से जो भी कामना करता है भोलेनाथ उनकी कामना को जरूर पूरी करते हैं।

विगत कुछ दिनों से बरगढ़ खोला में बोराई नाला अपने पूरे शबाब है और दो पहाड़ों के बीच से निकलती हुई नदी स्वरूप नाला भगवान भोलेनाथ के चरणों को चूमती हुई मदमस्त होकर इठलाती हुई बह रही है। बरसात के मौसम में या सावन के महीने में यहां जो प्राकृतिक दृश्य होता है उसकी सुंदरता और नदी के पानी तथा स्वच्छ शीतल हवा के साथ भक्ति का वातावरण मनुष्य को एक ऐसी दुनिया में ले जाता है जहां शांति ही शांति मिलती है। बताया जाता है कि भगवान सिद्धेश्वर नाथ यहां आए अपने हर भक्त को अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं। बरगढ़ खोला आप सभी को एक बार जरूर आना चाहिए और भगवान भोलेनाथ का दर्शन कर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए।

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