
खरसिया। शिक्षाविद् सर्वपल्ली डॉक्टर राधाकृष्णन जी के जयंती शिक्षक दिवस के अवसर पर राष्ट्र निर्माण एवं समाज हित में समर्पित गुरुजनों द्वारा अपने जीवन के शिक्षा सेवा में उत्कृष्ट योगदान हेतु चली आ रही परम्परा
शिक्षक केवल अक्षरों का ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि वह शिल्पकार है जो पीढ़ियों के भविष्य को आकार देता है। उसकी दी हुई सीख जीवन के पन्नों पर लंबे समय तक अंकित रहती है।
इसी भाव और कृतज्ञता के साथ शिक्षक दिवस के अवसर पर खरसिया विधानसभा क्षेत्र में सेवानिवृत्त शिक्षकों के सम्मान में तीन स्थानों पर गरिमामय समारोह आयोजित किए जाएंगे।
यह आयोजन शिक्षा के क्षेत्र में अपना जीवन समर्पित करने वाले उन गुरुजनों के प्रति सम्मान और आभार की अभिव्यक्ति होगा,जिन्होंने अपने ज्ञान, संस्कार और अनुशासन से असंख्य विद्यार्थियों के जीवन को दिशा दी। शहीद नंदकुमार पटेल द्वारा प्रारंभ की गई गौरवशाली परंपरा की निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है।
समारोह में खरसिया विधायक उमेश पटेल, जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) के अध्यक्ष नरेन्द्र नेगी सहित स्थानीय कांग्रेस पदाधिकारी एवं जनप्रतिनिधियों की गौरव पूर्ण उपस्थिति प्रस्तावित है। आयोजक कांग्रेसजनों का कहना है कि सेवानिवृत्ति शिक्षक की सेवा का अंत नहीं,बल्कि उनके अनुभव और जीवन-साधना की उस विरासत का पड़ाव है,जिसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना समाज की जिम्मेदारी है।
तेतला नंदेली मदनपुर में होगा सम्मान समारोह

05 सितंबर 2026, शनिवार को विधानसभा क्षेत्र में तीन अलग-अलग स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। तेतला स्थित स्वामी आत्मानंद हायर सेकेंडरी स्कूल में सुबह 10 बजे,नंदेली के महेन्द्र सिंह पटेल मेमोरियल आदर्श विद्यालय में दोपहर 12 बजे तथा मदनपुर स्थित कांग्रेस कार्यालय में शाम 04 बजे सम्मान समारोह होगा।
तेतला में कार्यक्रम समस्त ग्रामवासी तेतला एवं ब्लॉक कांग्रेस कमेटी पुसौर, नंदेली में समस्त ग्रामवासी नंदेली एवं ब्लॉक कांग्रेस कमेटी कोतरा तथा मदनपुर में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी खरसिया शहर/ग्रामीण के तत्वावधान में आयोजित किया जाएगा।
सम्मान उन हाथों का,जिन्होंने भविष्य संवारा
शिक्षक का जीवन अक्सर चॉक की धूल,कक्षा की चारदीवारी और विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं के बीच बीत जाता है। वर्षों की इस साधना में वह न जाने कितने बच्चों को केवल पढ़ाता ही नहीं,बल्कि उन्हें जीवन की कठिन राहों पर चलना भी सिखाता है। समय के साथ कक्षा छूट जाती है,पद और दायित्व पीछे रह जाते हैं,लेकिन शिक्षक की दी हुई सीख विद्यार्थियों के जीवन में जीवित रहती है।
ऐसे में शिक्षक दिवस पर सेवानिवृत्त गुरुजनों का सम्मान महज एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं,बल्कि उनके समर्पण,तपस्या और पीढ़ियों को गढ़ने वाली मौन साधना के प्रति समाज की कृतज्ञता का भाव है। कांग्रेस परिवार समारोह के माध्यम से गुरुजनों को सम्मानित किया जाना सुनिश्चित किया गया है,जिनकी जीवन-यात्रा ने शिक्षा के दीप को पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रज्वलित रखने में योगदान दिया।




