
सक्ती / खरसिया -इतिहास केवल किताबों में नहीं लिखा जाता, कभी-कभी वह पर्वतों की गोद में, जलधाराओं की कल-कल में और एक भक्त राजा के अश्रुपूरित स्वप्न में भी लिखा जाता है। सक्ती रियासत की पुण्य धरा पर स्थित तुरीधाम कुछ ऐसा ही दिव्य अध्याय है, जहाँ प्रकृति ने स्वयं शिव का श्रृंगार किया है और आस्था ने उसे मंदिर का आकार दिया है।

कथा उस काल की है जब सक्ती नरेश राजा बहादुर लीलाधर सिंह जी की शिवभक्ति अपनी पराकाष्ठा पर थी। कहते हैं सच्चे हृदय से की गई पुकार कैलाश तक अवश्य पहुँचती है। राजा की अटूट साधना से प्रसन्न होकर स्वयं देवाधिदेव महादेव ने उनके स्वप्न में आकर दर्शन दिए। स्वप्न कोई सामान्य स्वप्न न था, वह एक दिव्य आदेश था – सघन, दुर्गम वनों के बीच मेरे होने का आभास है, मुझे खोजो।

राजा ने उस स्वप्न को ईश्वरीय संकेत मानकर अपने सैनिकों और सेवकों के साथ बीहड़ जंगलों में खोज अभियान छेड़ दिया। दिन बीते, पगडंडियाँ थकीं, पर आस्था नहीं डिगी। तभी पर्वत श्रृंखलाओं के मौन को चीरती हुई एक मधुर, अलौकिक ध्वनि कानों में पड़ी – “तुर-तुर… तुर-तुर…”। देखा तो चट्टानों के हृदय को चीरकर एक शीतल, निर्मल जलधारा फूट रही थी, जैसे स्वयं गंगा शिव के जटाओं से उतर रही हो।

उसी निनाद को शिव का आमंत्रण मान जब उस पावन स्थल का उत्खनन कराया गया, तो सृष्टि ने अपना सबसे सुंदर रहस्य उजागर किया। धरती के गर्भ से, बिना किसी मानवीय स्पर्श के, एक स्वयंम्भू शिवलिंग प्रकट हुआ – तेजोमय, दिव्य और अनादि। राजा की आँखें कृतार्थ हो उठीं। उसी क्षण, उसी शिला पर, पूरे विधि-विधान के साथ राजा बहादुर लीलाधर सिंह जी ने महादेव की प्राण-प्रतिष्ठा कराई और तुरीधाम मंदिर की नींव रखी।
आज भी वह धारा उसी “तुर-तुर” की मधुर लय के साथ बहती है, और उसी ध्वनि पर इस धाम का नाम – तुरीधाम पड़ा। सावन की रिमझिम हो या महाशिवरात्रि की पावन रात्रि, यहाँ हजारों कंठ एक साथ “हर-हर महादेव” का जयघोष करते हैं, और वह जलधारा हर श्रद्धालु के मस्तक का अभिषेक करती है। यहाँ शिव केवल लिंग में नहीं, बूँद-बूँद में, कण-कण में बसते हैं।

इसी दिव्य स्थल पर हाल ही में अखिल भारतीय अघरिया समाज इकाई खरसिया के पदाधिकारियों ने दर्शन लाभ लिया। नंदेली के शिक्षक गोपी पटेल, अखिल भारतीय अघरिया समाज इकाई खरसिया अध्यक्ष हेमन्त कुमार पटेल, केन्द्रीय प्रतिनिधी गोपाल कृष्ण नायक “देहाती”,सचिव सह मीडिया प्रभारी नरेन्द्र पटेल एवं शिक्षका श्रीमती पुष्पा नरेन्द्र पटेल ने विधी विधान से पूजा पाठ करते हुए शिवलिंग पर जलाभिषेक कर समस्त सामाजिक बंधुओं और क्षेत्रवासियों के सुख, समृद्धि एवं मंगल का कामना हेतु प्रार्थना की।




