दिल्ली

ज्ञान अर्जित करो, संवैधानिक माध्यमों से अन्याय पर सवाल उठाओ और लोकतांत्रिक तरीकों से बदलाव लाओ: रक्षा मंत्री का युवाओं से आह्वान

“युवाओं को रोजगार सृजनकर्ता, समस्या समाधानकर्ता और सकारात्मक परिवर्तन के उत्प्रेरक बनना चाहिए, और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एकजुट ‘टीम इंडिया’ के हिस्से के रूप में काम करना चाहिए”

“सरकार एक ऐसा वातावरण बनाना जारी रखेगी जहां युवा बेहतर समाज के लिए समाधान तलाश सकें, नवाचार कर सकें, प्रयोग कर सकें, नए समाधान तैयार करे सकें और उन्हें विकसित कर सकें”

आर्थिक शक्ति किसी राष्ट्र को समृद्ध बनाती है, जबकि सांस्कृतिक आत्मविश्वास उसे महान बनाता है: श्री राजनाथ सिंह ने युवाओं से भारत की सभ्यता और विरासत पर गर्व करने का आग्रह किया

दिल्ली। “डॉ. बी.आर. अंबेडकर का मंत्र ‘शिक्षित हो, आंदोलन करो और संगठित हो’ का अर्थ है ज्ञान प्राप्त करना, अन्याय पर हिंसा से नहीं बल्कि संवैधानिक साधनों से सवाल उठाना और लोकतांत्रिक तरीकों से बदलाव लाने के लिए एकजुट होना,” रक्षा मंत्री  राजनाथ सिंह ने 29 अगस्त, 2026 को उत्तर प्रदेश के लखनऊ में बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा। सामाजिक परिवर्तन लाने में संवैधानिक तरीकों के महत्व पर जोर देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने संविधान सभा में अपने अंतिम भाषण में स्पष्ट रूप से कहा था कि सामाजिक और आर्थिक उद्देश्यों को संवैधानिक साधनों के माध्यम से ही प्राप्त किया जाना चाहिए। बाबासाहेब ने चेतावनी दी थी कि जब लोकतांत्रिक और संवैधानिक रास्ते उपलब्ध हों, तो हिंसा, अराजकता या असंवैधानिक तरीकों का सहारा लेना उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने ऐसे तरीकों को “अराजकता का व्याकरण” बताया जिसे त्याग देना चाहिए।

रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि विश्वविद्यालयों को न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के आदर्शों से प्रेरित युवा मस्तिष्कों को आकार देने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, ताकि वे राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान दे सकें। समग्र शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि सच्ची शिक्षा सोचने और समझने की क्षमता विकसित करती है, साथ ही व्यावहारिक और समस्या-समाधान कौशल को निखारती है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इसकी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका व्यक्तियों को अपने ज्ञान का उपयोग समाज के लाभ के लिए करना सिखाना है, साथ ही उनमें मूल्यों और संवेदनशीलता का संचार करना है।

मंत्री राजनाथ सिंह ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर द्वारा चरित्र और विनम्रता पर दिए गए जोर को याद करते हुए कहा कि ज्ञान और उपलब्धियां नैतिक मूल्यों और आचरण पर आधारित होनी चाहिए। स्वामी विवेकानंद के दृष्टिकोण से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए ही प्रयास न करें, बल्कि रोजगार सृजनकर्ता, समस्या समाधानकर्ता और सकारात्मक परिवर्तन के उत्प्रेरक बनकर भारत के रूपांतरण में योगदान दें।

रक्षा मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है, नई तकनीकें और नवाचार नए अवसर पैदा कर रहे हैं, और उन्होंने छात्रों से निरंतर सीखने और अनुकूलनशीलता के प्रति प्रतिबद्ध रहने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जो लोग निरंतर सीखने और नए कौशल हासिल करने के इच्छुक हैं, वे तेजी से विकसित हो रही दुनिया में प्रगति करने के लिए सबसे अच्छी तरह से तैयार होंगे।

राष्ट्र निर्माण में सामूहिक प्रयासों के महत्व पर जोर देते हुए श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि व्यक्तिगत प्रयास प्रगति में योगदान दे सकते हैं, लेकिन एकजुट संकल्प विकास की गति को कई गुना बढ़ा सकता है। उन्होंने छात्रों से ‘टीम इंडिया’ के हिस्से के रूप में काम करने और 2047 तक विकसित भारत के साझा लक्ष्य में योगदान देने का आह्वान किया।

रक्षा मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि सफलता अक्सर अनुकूल परिस्थितियों में नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए प्राप्त होती है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि दृढ़ संकल्प, सहनशीलता और कड़ी मेहनत चुनौतियों को अवसरों में बदल सकती है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में, प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी जी के नेतृत्व वाली सरकार ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ को बढ़ावा देकर, सेमीकंडक्टर विनिर्माण, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, स्टार्टअप और विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करके चुनौतियों को अवसरों में परिवर्तित करने का प्रयास किया है। उन्होंने छात्रों से अनिश्चितता से न डरने, बल्कि समाधानों पर ध्यान केंद्रित करने, समर्पण के साथ काम करने और निरंतर आत्म-सुधार के लिए प्रयासरत रहने का आग्रह किया, जो सफलता की कुंजी है।

अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की बढ़ती उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश ने सीमित संसाधनों से मिशन शुरू करने से लेकर मानव अंतरिक्ष उड़ान और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन सहित उन्नत कार्यक्रमों को क्रियान्वित करने तक प्रगति की है। उन्होंने निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका पर भी जोर दिया, जिसमें भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप्स ने प्रक्षेपण यानों और उपग्रह प्रौद्योगिकी में महत्वपूर्ण प्रगति की है।

पिछले 12 वर्षों में शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार इकोसिस्टम में हुई महत्वपूर्ण प्रगति पर बोलते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि अनुसंधान और विकास पर व्यय दोगुना हो गया है, 34 वर्षों के बाद राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की गई है, और भारतीय युवा अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाडों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं, स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं, यूनिकॉर्न कंपनियां बना रहे हैं और उन्नत प्रौद्योगिकियां विकसित कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारत वैश्विक नवाचार सूचकांक में ऊपर चढ़कर और दुनिया के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम के रूप में उभरकर तेजी से वैश्विक नवाचार का केंद्र बन रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार एक ऐसा इकोसिस्टम  बनाने का काम जारी रखेगी जहां युवा बेहतर समाज के लिए समाधान तलाश सकें, नवाचार कर सकें, प्रयोग कर सकें, सृजन कर सकें और विकसित कर सकें।

मंत्री राजनाथ सिंह ने देश की संस्कृति, सभ्यता और विरासत के संरक्षण और गौरव पर बल देते हुए कहा कि विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत की यात्रा को केवल आर्थिक विकास से नहीं मापा जा सकता। उन्होंने कहा कि आर्थिक शक्ति किसी राष्ट्र को समृद्ध बनाती है, जबकि सांस्कृतिक आत्मविश्वास उसे महान बनाता है। उन्होंने भारतीय भाषाओं, भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला।

रक्षा मंत्री ने कहा, “भारत न केवल एक प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है, बल्कि एक ऐसे राष्ट्र के रूप में भी उभरा है जो अपनी सभ्यता, संस्कृति और क्षमता में विश्वास रखता है। आज जब हम बोलते हैं, तो दुनिया सुनती है। हम केवल नियमों का पालन नहीं करते, बल्कि उन्हें बनाते हैं। आज की पीढ़ी को राष्ट्र की पहचान पर गर्व है, अपनी सभ्यता में विश्वास है और भविष्य पर भरोसा है। ‘नए भारत’ में यही सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ है। ‘भारत में विश्वास’ की भावना ही ‘मेक इन इंडिया’ की सफलता के पीछे है।”

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, लखनऊ स्थित बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राज कुमार मित्तल और विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

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Gopal Krishna Naik

Editor in Chief Naik News Agency Group

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