
खरसिया। भालूनारा से रॉबर्टसन रेलवे साइडिंग तक जर्जर सड़क,भारी कोयला वाहनों की लगातार आवाजाही और लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग पर कार्यवाही नहीं होने से क्षेत्रवासियों का आक्रोश अब जन-आंदोलन में बदलने जा रहा है। नवागांव समेत आस-पास के ग्रामीणों ने 16 अगस्त 2026 से अनिश्चितकालीन चक्काजाम और धरना-प्रदर्शन का ऐलान किया है। प्रशासन को दिए आवेदन में ग्रामीणों ने साफ कहा है कि सड़क की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन जारी रहेगा।
ग्रामीणों का आरोप है कि भालूनारा से रॉबर्टसन तक की सड़क पर दिन-रात ओवरलोड कोयला वाहनों की आवाजाही होती है। भारी वाहनों के दबाव के कारण सड़क जगह-जगह बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है और बड़े-बड़े गड्ढे दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक इसी मार्ग से आम लोगों के साथ स्कूली बच्चों की आवाजाही होती है, जिससे हर समय हादसे का खतरा बना रहता है।
कागजों में दौड़ती रही सड़क,जमीन पर नहीं शुरू हुआ निर्माण

मामला केवल ग्रामीणों की शिकायत तक सीमित नहीं है। लोक निर्माण विभाग,उपसंभाग खरसिया की ओर से जारी पत्र में उल्लेख है कि शासन तिहार 2025 के तहत नवागांव निवासी रामेश्वर प्रसाद का आवेदन प्राप्त हुआ था,जिसमें रॉबर्टसन रेलवे साइडिंग से सड़क निर्माण की मांग की गई थी। विभाग ने अपने पत्र में बताया कि संबंधित मार्ग निर्माण कार्य बजट वर्ष 2023-24 में शामिल था,लेकिन वर्तमान में विलोपित हो चुका है।
विभागीय पत्र के अनुसार उक्त मार्ग के निर्माण के लिए ₹26 करोड़ की राशि का प्रावधान आगामी बजट में शामिल करने हेतु उच्च कार्यालय को पत्र भेजा गया है। यानी समस्या को लेकर विभागीय स्तर पर पत्राचार तो हुआ,लेकिन ग्रामीणों को अभी तक सड़क निर्माण की ठोस शुरुआत दिखाई नहीं दी।
अप्रैल 2025 में भी उठी थी आवाज, फिर भी हालात जस के तस

ग्राम पंचायत नवागांव की ओर से 29 अप्रैल 2025 को कलेक्टर रायगढ़ को दिए गए आवेदन में भी भालूनारा से रॉबर्टसन तक जर्जर सड़क का मुद्दा उठाया गया था। आवेदन में कहा गया था कि भारी कोयला वाहनों की आवाजाही के कारण सड़क खराब हो चुकी है और दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है।
ग्रामीणों ने उस समय सड़क निर्माण के साथ-साथ देवारास/देवस्थल से अमरेया तक लगभग 500 मीटर नाली निर्माण और ओंकार घर के पास रेलिंग लगाने की मांग भी रखी थी, ताकि कोयले का गंदा पानी बस्ती की गलियों में न पहुंचे और दुर्घटनाओं पर अंकुश लगे।
आश्वासन की समय सीमा बीती,निर्माण का इंतजार जारी
क्षेत्रवासियों द्वारा दिए गए आंदोलन संबंधी आवेदन में दावा किया गया है कि मई 2025 में एक दिवसीय प्रदर्शन के माध्यम से प्रशासन को सड़क की समस्या से अवगत कराया गया था। इसके बाद अक्टूबर 2025 में नए सड़क निर्माण की अवधि दिए जाने की बात सामने आई, लेकिन लगभग 10 महीने गुजरने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका।
अब ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार आवेदन, ज्ञापन और प्रशासनिक स्तर पर उठाए गए मुद्दों के बावजूद यदि सड़क निर्माण की दिशा में निर्णायक कार्यवाही नहीं होती,तो उनके पास जन आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता।
नवागांव चौक से उठेगी आवाज,कई गांव होंगे शामिल

अनिश्चितकालीन जन आंदोलन के लिए दिए गए अनुमति आवेदन में नवागांव, भालूनारा,पामगढ़,रजघटा,छोटे डूमरपाली और बड़े डूमरपाली सहित आस-पास के क्षेत्रवासियों के शामिल होने की बात कही गई है। आवेदन के अनुसार 16 अगस्त 2026 से सुबह 09 बजे नवागांव यश किरान दुकान के सामने चक्काजाम एवं धरना-प्रदर्शन प्रस्तावित है।
ग्रामीणों ने प्रशासन को यह भी स्पष्ट किया है कि जन आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से किया जाएगा,लेकिन सड़क की समस्या का समाधान होने तक जन आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया गया है।
सवाल सिर्फ सड़क का नहीं,जवाबदेही का भी

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस सड़क पर भारी कोयला वाहनों का नियमित दबाव है,उसकी स्थिति सुधारने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? यदि सड़क निर्माण के लिए करोड़ों रुपये के प्रावधान की जरूरत महसूस की जा रही है, तो तब तक भारी वाहनों के सुरक्षित संचालन,सड़क रख-रखाव, जल निकासी और दुर्घटना रोकने के तात्कालिक इंतजाम क्यों नहीं किए गए—यह सवाल ग्रामीण अब प्रशासन से सीधे पूछ रहे हैं।
एक तरफ विभागीय पत्रों में सड़क निर्माण के लिए राशि प्रस्तावित करने और उच्च कार्यालय को पत्र भेजने की जानकारी है, दूसरी तरफ ग्रामीणों के मुताबिक सड़क आज भी गड्ढों में तब्दील है और कोयला परिवहन बदस्तूर जारी है। ऐसे में कागजों में चल रहे पत्राचार और जमीन पर दिखाई देने वाली हकीकत के बीच बढ़ता अंतर ही आंदोलन की सबसे बड़ी वजह बनता नजर आ रहा है।

अब 16 अगस्त 2026 को प्रस्तावित चक्काजाम प्रशासन के लिए भी परीक्षा की घड़ी होगी। सवाल यह है कि आंदोलन शुरू होने से पहले सड़क निर्माण की ठोस कार्ययोजना सामने आती है या फिर ग्रामीण एक बार फिर आश्वासन के भरोसे छोड़ दिए जाएंगे…



