
शिकायतों के सियासी-साजिशी साए से निकली सच्चाई,शासन ने फिर सौंपी शिक्षा की कमान
यूँ तो कहा जाता है—क्रांति की पहली मशाल हो या प्रलय की अंतिम आहट,उसे दिशा देने का सामर्थ्य एक शिक्षक के हाथों में होता है; लेकिन जब सत्य के इस संघर्ष में दोनों ओर शिक्षक खड़े हों,तब निर्णायक शब्द वाणी नहीं,बल्कि चरित्र की उज्ज्वलता,कर्म की निष्कलंकता और सत्य की अडिग शक्ति लिखती है…
खरसिया।खरसिया के शिक्षा जगत में लंबे समय से चर्चा का विषय रहे विकासखंड स्रोत समन्वयक प्रदीप कुमार साहू की आखिरकार बीआरसी पद पर वापसी हो गई है। छत्तीसगढ़ शासन ने उन्हें पुनः विकासखंड स्रोत समन्वयक,समग्र शिक्षा खरसिया के पद पर प्रतिनियुक्ति देते हुए तत्काल प्रभाव से पदस्थ किया है। शासन के इस आदेश के बाद शिक्षा जगत में इसे सच्चाई और कार्यक्षमता की जीत के रूप में देखा जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्कूल शिक्षा विभाग, मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर द्वारा जारी आदेश क्रमांक ESTB-102(2)/565/2026/20-3, दिनांक 08 सितंबर 2026 के तहत प्रदीप कुमार साहू को प्रतिनियुक्ति पर लेते हुए विकासखंड स्रोत समन्वयक के पद पर पदस्थ किया गया है।
शिकायतों के बाद हटे,समीक्षा के बाद फिर लौटे
प्रदीप साहू की कार्यशैली को लेकर खरसिया के शिक्षा क्षेत्र में लंबे समय से सकारात्मक चर्चा रही है। इसी दौरान उनके विरुद्ध मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद उन्हें बीआरसी पद से हटाया गया था। हालांकि,शिकायतों में लगाए गए आरोपों और वास्तविक परिस्थितियों की शासन स्तर पर समीक्षा के बाद अब उन्हें दोबारा उसी जिम्मेदारी पर भेजा गया है।
यदि किसी ईमानदार और सक्रिय अधिकारी को केवल शिकायतों के आधार पर जिम्मेदारी से हटाया जाता है,तो शिकायत की सत्यता की निष्पक्ष पड़ताल कितनी जरूरी है? प्रदीप साहू की वापसी ने कम से कम इतना स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासनिक निर्णयों में समीक्षा और तथ्य की भूमिका निर्णायक होती है।
शिक्षा विरोधी मानसिकता पर करारा संदेश
खरसिया में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने,कार्यों में पारदर्शिता और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने वाले प्रदीप साहू की वापसी को उनके समर्थक उन लोगों के लिए करारा जवाब मान रहे हैं, जिन्होंने कथित रूप से शिकायतों के जरिए उनकी कार्यशैली को प्रभावित करने का असफलप्रयास किया।
हालांकि शिकायतकर्ताओं के आरोपों और उनके पीछे किसी कथित उद्देश्य को लेकर स्वतंत्र रूप से कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है, लेकिन शासन द्वारा पुनः बीआरसी पद पर नियुक्त किया जाना निश्चित रूप से यह संकेत देता है कि विभाग ने उनकी सेवाओं और कार्यक्षमता पर फिर भरोसा जताया है।
शिक्षकों और पालकों में उत्साह
प्रदीप साहू की वापसी की खबर सामने आते ही खरसिया विकासखंड के शिक्षकों,विद्यार्थियों और पालकों के बीच उत्साह का माहौल है। शिक्षा से जुड़े लोगों का मानना है कि उनके अनुभव और सक्रिय कार्यशैली से विकासखंड में शैक्षणिक गतिविधियों, नवाचार और विभागीय समन्वय को नई गति मिल सकती है।
यह वापसी केवल एक अधिकारी की पदस्थापना नहीं,बल्कि शिक्षा व्यवस्था में काम करने वाले अधिकारियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी मानी जा रही है—शिकायतें प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकती हैं,लेकिन अंतिम निर्णय तथ्यों और समीक्षा के आधार पर ही होना चाहिए।
अब असली परीक्षा

प्रदीप साहू व्याख्याता एल बी से विकासखण्ड स्त्रोत समन्वयक,समग्र शिक्षा खरसिया विकासखंड खरसिया जिला रायगढ़ वापसी के साथ उनके सामने अब सबसे बड़ी चुनौती पहले से अधिक प्रभावी ढंग से शिक्षा व्यवस्था को आगे बढ़ाने की होगी। शासन- प्रशासन उन पर दोबारा भरोसा जताया है, ऐसे में अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि खरसिया में शिक्षा की गुणवत्ता, पारदर्शिता,नवाचार और विभागीय कार्यप्रणाली को वे किस तरह नई दिशा देते हैं।
फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि जिस पद से उन्हें शिकायतों के बाद हटाया गया था, उसी पद पर शासन प्रशासन ने उन्हें दोबारा जिम्मेदारी सौंप दी है। यह घटनाक्रम अपने आप में उन तमाम सवालों का जवाब है,जो उनकी कार्यशैली और पदस्थापना को लेकर खड़े किए गए थे।




