
निरीक्षक राकेश मिश्रा एवं ममता मिश्रा बने यजमान,वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ भगवान शिव का अभिषेक

खरसिया। खरसिया चौकी परिसर स्थित धामा दाई मंदिर में आस्था, अध्यात्म और वैदिक परंपरा का मनोहारी संगम देखने को मिला।

देवाधिदेव भगवान महादेव के प्रति श्रद्धा अर्पित करते हुए चक्रधर नगर थाना प्रभारी निरीक्षक राकेश मिश्रा उनकी पत्नी ममता मिश्रा यजमान के रूप में रुद्राभिषेक में शामिल हुए। विद्वान आचार्यों के सानिध्य में विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान शिव का पूजन एवं अभिषेक संपन्न हुआ।
रुद्राभिषेक के दौरान मंदिर परिसर में विद्वान आचार्यो द्वारा मंत्रोच्चार की गूंजते ध्वनि और श्रद्धा से जुड़े वातावरण ने पूरे परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। यजमान दंपती ने श्रद्धापूर्वक भगवान शिव का अभिषेक करते हुए लोककल्याण, सुख-शांति, समृद्धि और सर्वमंगल की कामना की।
शास्त्रों में भगवान शिव के रुद्र स्वरूप की उपासना को मन,वचन और कर्म की शुद्धि का माध्यम माना गया है। इसी भाव को अभिव्यक्त करता है—
“ॐ नमः शिवाय शान्ताय, हरये परमात्मने।
प्रणतक्लेशनाशाय, योगिनां पतये नमः॥”
अर्थात् शांत स्वरूप भगवान शिव को नमन है, जो शरणागतों के कष्टों का नाश करने वाले और समस्त योगियों के आराध्य हैं।
रुद्राभिषेक के उपरांत भगवान शिव का विशेष श्रृंगार किया गया। सजे हुए शिवलिंग के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। इसके पश्चात श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में भगवान महादेव की आरती संपन्न हुई। आरती के दौरान मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा।

भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में शिव केवल आराधना के देव नहीं, बल्कि संहार में सृजन,वैराग्य में करुणा और मौन में चेतना के प्रतीक माने जाते हैं। उनका रुद्र स्वरूप जीवन में व्याप्त अंधकार और विकारों के विनाश का संदेश देता है, जबकि उनका शांत स्वरूप संयम, करुणा और लोकमंगल की प्रेरणा देता है।
“त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥”
महामृत्युंजय मंत्र की यह पवित्र ध्वनि मानो यही प्रार्थना करती है कि मानव जीवन भय, बंधन और विपत्तियों से मुक्त होकर शांति, आरोग्य और सद्भाव की ओर अग्रसर हो।
धामा दाई मंदिर में संपन्न यह धार्मिक अनुष्ठान केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहा,बल्कि आस्था,संस्कार और आध्यात्मिक चेतना का अवसर बन गया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया और आरती में सहभागी होकर लोकमंगल की कामना की।

महादेव की आराधना का सार भी यही है—जहां श्रद्धा होती है,वहां भीतर का अंधकार धीरे-धीरे प्रकाश में बदलने लगता है और जहां शिव का स्मरण होता है, वहां जीवन में शांति और संयम का संचार होता है।
हर हर महादेव।




