
एनएच-49 पर दुर्घटना के बाद राहत और बचाव की चर्चा तो होती है,लेकिन सड़क को तत्काल सुरक्षित बनाने की जिम्मेदारी अक्सर अधूरी रह जाती है…
खरसिया। राष्ट्रीय राजमार्ग-49 पर सड़क दुर्घटनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा,लेकिन उससे भी अधिक चिंताजनक तस्वीर दुर्घटना के बाद देखने को मिल रही है। हादसों में क्षतिग्रस्त वाहन घंटों नहीं, बल्कि लंबे समय तक सड़क किनारे या सड़क पर ही पड़े रहते हैं,मानो वे अगली दुर्घटना को खुला निमंत्रण दे रहे हों।
विडंबना यह है कि सड़क से बाधा हटाने की जिम्मेदारी जिन संस्थाओं पर है, उनकी सक्रियता मौके पर दिखाई नहीं देती। तेज़ रफ्तार से दौड़ते वाहनों के बीच खड़े ये क्षतिग्रस्त वाहन हर गुजरने वाले चालक के लिए नया खतरा बन चुके हैं। सवाल यह है कि क्या किसी और की जान जोखिम में पड़ने के बाद ही जिम्मेदार विभाग जागेगा?
राष्ट्रीय राजमार्ग को सुरक्षित और सुगम बनाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि दुर्घटनाग्रस्त वाहन कई बार स्वयं एक नई दुर्घटना का कारण बनने की स्थिति में छोड़ दिए जाते हैं। यदि सड़क पर अवरोध हटाने की व्यवस्था समयबद्ध और प्रभावी होती, तो कई संभावित हादसों को रोका जा सकता था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि एनएच-49 पर दुर्घटना के बाद राहत और बचाव की चर्चा तो होती है,लेकिन सड़क को तत्काल सुरक्षित बनाने की जिम्मेदारी अक्सर अधूरी रह जाती है। ऐसे में आम नागरिकों की सुरक्षा आखिर किसके भरोसे है?
अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है—क्या प्रशासन और संबंधित एजेंसियां किसी और दुर्घटना का इंतजार कर रही हैं, या फिर एनएच-49 को वास्तव में सुरक्षित बनाने के लिए ठोस और त्वरित कार्यवाही होगी?




