खरसिया विकासखंड की 137 छात्राएं सरस्वती साइकिल योजना से महरूम…

वितरण के लिए आई साइकिलें कबाड़ में तब्दील, जिम्मेदारों की लापरवाही पर उठे सवाल — सुविधा देने आई योजना, व्यवस्था की उदासीनता की भेंट चढ़ी
खरसिया। बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ने और उनके विद्यालय तक आवागमन को आसान बनाने के उद्देश्य से संचालित सरस्वती साइकिल योजना की जमीनी हकीकत खरसिया विकासखंड में सवाल खड़े कर रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विकासखंड की 137 पात्र छात्राएं साइकिल मिलने की सुविधा से वंचित रह गईं, जबकि उनके लिए आई साइकिलें लंबे समय तक वितरण के इंतजार में पड़ी-पड़ी कबाड़ में तब्दील होने की स्थिति में पहुंच गईं।
सरस्वती साइकिल योजना का मूल उद्देश्य शासकीय एवं अनुदान प्राप्त अशासकीय विद्यालयों में कक्षा 9वीं में अध्ययनरत अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति तथा बीपीएल वर्ग की पात्र छात्राओं को विद्यालय तक आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराना और बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करना है। ऐसे में पात्र छात्राओं तक समय पर साइकिल नहीं पहुंचना योजना के उद्देश्य और उसके क्रियान्वयन के बीच गंभीर अंतर को सामने लाता है।
सुविधा देने आई साइकिलें बनीं कबाड़
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब छात्राओं के लिए साइकिलें उपलब्ध थीं, तो उनका समय पर वितरण क्यों नहीं हुआ? यदि साइकिलें लंबे समय तक खुले में अथवा अनुपयुक्त स्थान पर रखे जाने के कारण खराब हुईं, तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय की गई?
एक ओर छत्तीसगढ़ शासन बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए योजनाओं पर संसाधन खर्च कर रहा है, वहीं दूसरी ओर योजना के तहत उपलब्ध सामग्री ही उपयोग में आने से पहले खराब हो जाए तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं, बल्कि सार्वजनिक संसाधनों के संरक्षण और जवाबदेही का भी प्रश्न बन जाता है।
137 छात्राओं के भविष्य से जुड़ा सवाल
विद्यालय तक पहुंचने के साधन का अभाव ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों की छात्राओं के लिए पढ़ाई जारी रखने में व्यावहारिक बाधा बन सकता है। ऐसे में साइकिल योजना महज साइकिल वितरण की योजना नहीं, बल्कि बालिकाओं की शिक्षा और नियमित विद्यालय उपस्थिति से जुड़ी सरकारी पहल है।
इसलिए सवाल सिर्फ 137 साइकिलों का नहीं है। सवाल यह है कि पात्र छात्राओं को जिस सुविधा का अधिकार था, वह समय पर क्यों नहीं मिली और शासन के संसाधनों से खरीदी गई साइकिलें उपयोग में आने से पहले ही खराब कैसे हो गईं?
जिम्मेदारों पर कब होगी कार्यवाही?
अब स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों से जवाबदेही की मांग उठना स्वाभाविक है। यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि साइकिलों के वितरण में जानबूझकर अथवा लापरवाही के कारण देरी हुई और इसके चलते सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा,तो संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका तय कर कार्यवाही की जानी चाहिए।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि 137 पात्र छात्राओं को अब साइकिल कब और किस व्यवस्था के तहत उपलब्ध कराई जाएगी।
जांच से सामने आ सकता है पूरा सच
मामले में शिक्षा विभाग को उपलब्ध साइकिलों की संख्या, प्राप्ति की तारीख,वितरण के लिए निर्धारित समयसीमा,भंडारण स्थल,वर्तमान स्थिति और पात्र छात्राओं की सूची सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि साइकिलें खराब हुई हैं तो उनकी वर्तमान स्थिति और हुए वित्तीय नुकसान का भी आकलन जरूरी है।
बालिका शिक्षा के नाम पर बनी योजना में यदि लाभार्थी बालिकाएं ही लाभ से वंचित रह जाएं और उनके हिस्से की साइकिलें कबाड़ में बदल जाएं, तो यह व्यवस्था के सामने खड़ा एक गंभीर सवाल है—आखिर इस लापरवाही की जिम्मेदारी कौन लेगा?




