
खरसिया। भालुनारा से राबर्टसन स्टेशन सड़क की बदहाली को लेकर ग्रामीणों का आंदोलन बुधवार को भी जारी रहा। मंगलवार को ढ़लती शाम को हुई चर्चा के बाद तय समय पर आज खरसिया विधायक उमेश पटेल धरना स्थल पहुंचे और प्रशासनिक अधिकारियों का इंतजार करते हुए ग्रामीणों के बीच मौजूद रहे। विधायक पटेल की यह मौजूदगी उस समय खास रही,जब ग्रामीण अपनी सड़क की मांग को लेकर लगातार संघर्षरत हैं।

दोपहर करीब डेढ़ से दो बजे के बीच अनुविभागीय अधिकारी राजस्व खरसिया प्रवीण भगत धरना स्थल नवागाँव पहुंचे। उन्होंने सार्वजनिक मंच से आंदोलन कर रहे ग्रामीणों को बताया कि भालूनारा से नवागांव होते हुए राजन कोलवाशरी तक सड़क का काम 11 करोड़ आस-पास के लागत में 1अक्टूबर से शुरूहो पाएगा। वहीं राजन कोलवाशरी से राबर्टसन तक सड़क निर्माण का राशि का स्वीकृति के लिए भेजा गया है। उनका कहना था कि वर्तमान बारिश के परिस्थितियों में इस हिस्से में तत्काल सड़क निर्माण संभव नहीं है।

प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद विधायक उमेश पटेल ने स्वयं ग्रामीणों के बीच संवाद किया। उन्होंने आंदोलनकारियों से सीधा सवाल किया कि अनुविभागीय अधिकारी राजस्व खरसिया प्रवीण भगत द्वारा दी गई जानकारी से क्या वे सहमत हैं? जवाब में ग्रामीणों ने एक स्वर में अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी—जब तक सड़क नहीं बनेगी,तब तक उद्योगों के बड़े वाहनों का इस मार्ग पर संचालन नहीं होने दिया जाएगा और हड़ताल सुचारू रूप से जारी रहेगी।

ग्रामीणों का यह जवाब केवल असहमति नहीं,बल्कि झेली जा रही परेशानी का परिणाम दिखाई दिया। उनका तर्क है कि आश्वासन और प्रस्ताव अपनी जगह हैं, लेकिन उन्हें अब कागजों से आगे बढ़कर जमीन पर सड़क चाहिए। खराब सड़क के कारण आवागमन,ग्रामीण जीवन और स्थानीय व्यवस्था पर पड़ रहे असर के बीच आंदोलनकारियों ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।

इस पूरे घटनाक्रम में विधायक उमेश पटेल की भूमिका भी उल्लेखनीय रही। वे केवल औपचारिक मुलाकात कर लौटने के बजाय ग्रामीणों के बीच घंटो बैठे,उनकी बात सुनी और प्रशासनिक अधिकारी के सामने रखे गए प्रस्ताव पर ग्रामीणों की राय जानने को प्राथमिकता दी।

इसी दौरान जब बात आगे नहीं बनती दिखे अनुविभागिय अधिकारी राजस्व खरसिया प्रवीण भगत के साथ धरना स्थल पहुंचे खरसिया तहसील के प्रभारी तहसीलदार उज्ज्वल पाण्डेय,खरसिया थाना से एस आई अमरनाथ शुक्ला,ए एस उमाशंकर धृतांत आरक्षक विसोब सिंह धरना प्रदर्शन स्थल नवागाँव से चले गए। इसके बाद भी ग्रामीण आंदोलन से पीछे नहीं हटे। प्रशासन के आश्वासन और प्रस्ताव के बावजूद उन्होंने साफ कर दिया कि सड़क निर्माण की ठोस शुरुआत तक आंदोलन जारी रहेगा।
आश्वासन और सड़क के बीच का फासला

नवागांव का आंदोलन अब केवल एक सड़क की मांग तक सीमित नहीं दिख रहा,बल्कि यह उस सवाल को सामने ला रहा है कि विकास के वादों का वास्तविक लाभ जमीन पर कब पहुंचेगा। ग्रामीणों के लिए 01अक्टूबर की प्रस्तावित शुरुआत उम्मीद जरूर है, लेकिन राजन कोलवाशरी से राबर्टसन तक सड़क के लिए बजट स्वीकृति अभी भविष्य की प्रक्रिया है।

यही कारण है कि ग्रामीणों ने फिलहाल आंदोलन समाप्त करने के बजाय उसे जारी रखने का निर्णय लिया है। उनके लिए भरोसे की अंतिम कसौटी कागज नहीं,सड़क पर बिछती निर्माण सामग्री और शुरू होता काम है।

नवागांव में बुधवार का दिन इसी संदेश के साथ समाप्त हुआ—बातचीत जारी रह सकती है,आश्वासन भी मिल सकते हैं,लेकिन ग्रामीणों की मांग स्पष्ट है: सड़क चाहिए।

आगे अब निगाह प्रशासन के घोषित 01 अक्टूबर के कार्यारंभ और करोड़ रुपये के प्रस्ताव की प्रक्रिया पर रहेगी। यदि घोषित समय सीमा पर काम जमीन पर उतरता है,तो यह लंबे आंदोलन को समाधान की दिशा में ले जाने वाला निर्णायक कदम होगा।फिलहाल ग्रामीणों ने अपना रुख साफ कर दिया है—सड़क बनने तक संघर्ष जारी रहेगा।



