
खरसिया जनपद पंचायत भवन नव निर्माण की बाट जोह रहा,जिम्मेदारों की नजर-ए-इनायत का इंतजार…
खरसिया। खरसिया क्षेत्र के ग्रामीण विकास की योजनाओं और 81 ग्राम पंचायतों के प्रशासनिक कामकाज का प्रमुख केंद्र जनपद पंचायत खरसिया का भवन खुद बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है। वर्षों पुराने और जर्जर हो चुके भवन की हालत देखकर सहज ही सवाल उठता है कि जब ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और कायाकल्प की जिम्मेदारी संभालने वाला कार्यालय ही अपने कायाकल्प की राह देख रहा है, तो फिर इसकी सुध आखिर कौन लेगा?
भवन की बाहरी दीवारों पर जगह-जगह सीलन,उखड़ता प्लास्टर और बढ़ती जर्जरता साफ दिखाई देती है। बारिश के मौसम में स्थिति और भी चिंताजनक हो जाती है। तस्वीरें इस बात की गवाही दे रही हैं कि यह भवन अब महज एक सरकारी कार्यालय नहीं,बल्कि अपने पुनर्निर्माण की प्रतीक्षा करती व्यवस्था की तस्वीर बन चुका है।
81 ग्राम पंचायतों का मुख्यालय, फिर भी उपेक्षा क्यों?

जनपद पंचायत खरसिया के अधीन आने वाली 81 ग्राम पंचायतों से जुड़े विकास कार्यों, योजनाओं और प्रशासनिक गतिविधियों का संचालन इसी कार्यालय से होता है। ऐसे में इस भवन का सुरक्षित और सुव्यवस्थित होना केवल कर्मचारियों की सुविधा का विषय नहीं, बल्कि ग्रामीण प्रशासन की कार्यक्षमता से भी जुड़ा सवाल है।

स्थानीय स्तर पर अब यह सवाल उठने लगा है कि जब विकास कार्यों के लिए करोड़ों रुपये की योजनाएं बनाई जाती हैं, तो जनपद पंचायत के मूलभूत ढांचे के कायाकल्प की ओर अपेक्षित ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा है?
भव्य आयोजनों के बीच उम्मीदें, लेकिन हाथ लगी मायूसी
खरसिया क्षेत्र में समय-समय पर होने वाले बड़े और भव्य सरकारी आयोजनों से ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों को विकास की नई सौगातों की उम्मीद रहती है। लोगों को उम्मीद थी कि जनपद पंचायत जैसे महत्वपूर्ण संस्थान के जर्जर भवन के लिए भी कोई ठोस घोषणा या पहल सामने आएगी। लेकिन ऐसी उम्मीदों पर पानी फिरने से स्थानीय लोगों में निराशा का भाव दिखाई दे रहा है।
अब जरूरत केवल मरम्मत की खानापूर्ति की नहीं,बल्कि भवन की वास्तविक स्थिति का तकनीकी मूल्यांकन कर आवश्यकतानुसार नए भवन के निर्माण की ठोस पहल करने की है।
ग्रामीण क्षेत्र के साथ दोहरा मापदंड क्यों?

स्थानीय लोगों का कहना है कि खरसिया नगर और ग्रामीण क्षेत्र के विकास को लेकर यदि समान दृष्टिकोण अपनाया जाए,तो जनपद पंचायत भवन जैसे महत्वपूर्ण संस्थान की यह स्थिति लंबे समय तक नहीं बनी रहती। सवाल यह भी है कि ग्रामीण विकास का केंद्र ही यदि जर्जर भवन में संचालित होता रहेगा तो ग्रामीण क्षेत्र के साथ विकास के मामले में यह दोहरा मापदंड आखिर कब तक?

अब क्षेत्रवासियों की नजर प्रशासन और सत्ताधारी जनप्रतिनिधियों पर है कि 81 ग्राम पंचायतों के मुख्यालय को कब नया और सुरक्षित भवन मिलेगा और जर्जर जनपद पंचायत भवन का कायाकल्प कब होगा?




