शिक्षा के पथ पर खरसिया की श्रीमती भुनेश्वरी मंथन की लगातार चार उपलब्धियां,सितंबर में मिले चार प्रतिष्ठित सम्मान…

✍दिलीप मंथन@ राबर्टसन। शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों के पन्नों तक सीमित नहीं होती,वह संस्कारों,नवाचारों और नई पीढ़ी के सपनों को आकार देने की सतत साधना है। इसी साधना को अपने कर्म का आधार बनाकर खरसिया विकासखंड की शिक्षिका श्रीमती भुनेश्वरी मंथन ने सितंबर 2026 में शिक्षा के क्षेत्र में लगातार चार प्रतिष्ठित सम्मान हासिल कर क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है। उनके कार्यों और नवाचारों को विभिन्न मंचों पर मिली मान्यता ने खरसिया के शिक्षा जगत में एक नई प्रेरक कहानी लिखी है।

शिक्षा सारांश और ‘शिक्षाशिल्पी’ में नवाचारों को स्थान

छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के रजत जयंती वर्ष में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों और नवाचारों के लिए एम.डी. एजुकेशन सोसाइटी, सरायपाली द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में भुनेश्वरी मंथन को “एजुकेशन स्कल्प्टर अवार्ड–2026” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान राज्य शिक्षा आयोग के अध्यक्ष सुधीर गौतम, कलिंगा यूनिवर्सिटी रायपुर के कुलसचिव डॉ. संदीप गांधी तथा शिक्षाविद् डॉ. अनिल कुमार प्रधान के हाथों प्रदान किया गया।
इस सम्मान के लिए पूरे छत्तीसगढ़ से उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों का नामांकन आमंत्रित किया गया था।

चयनित शिक्षकों के शैक्षिक नवाचारों को ‘शिक्षाशिल्पी’ नामक वार्षिक पत्रिका में स्थान दिया गया है। वहीं एम.डी. एजुकेशन सोसाइटी, सरायपाली एवं कलिंगा यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में प्रकाशित ‘शिक्षा सारांश’ मासिक पत्रिका में भी भुनेश्वरी मंथन के विभिन्न नवाचारों को स्थान मिला है।
05 सितंबर को मिला ‘शिक्षादूत पुरस्कार’

शिक्षक दिवस के अवसर पर 5 सितंबर 2026 को शिक्षा विभाग की ओर से मुख्यमंत्री गौरव अलंकरण के अंतर्गत भुनेश्वरी मंथन को ‘शिक्षादूत पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। रायगढ़ ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में उन्हें प्रशस्ति-पत्र के साथ 5 हजार रुपये की सम्मान राशि प्रदान की गई। यह सम्मान छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी के करकमलों से प्रदान किया गया।
‘गुरु सम्मान 4.0’ में भी खरसिया की पहचान

7 सितंबर 2026 को दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल, भाटापारा में आयोजित ‘गुरु सम्मान 4.0’ में भी भुनेश्वरी मंथन को सम्मानित किया गया। आयोजन में विभिन्न 40 विद्यालयों से शिक्षक एवं प्रधानाचार्य शामिल हुए।
समारोह में शिक्षा, संस्कार और गुरु-शिष्य परंपरा को केंद्र में रखते हुए विभिन्न कार्यक्रम हुए। इस अवसर पर शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षकों को स्मृति-चिह्न, शॉल एवं श्रीफल देकर सम्मानित किया गया। सम्मानित गुरुओं की सामूहिक महाआरती ने समारोह को भावनात्मक और आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की।
19 सितंबर को मिला राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान

रायगढ़ नगर निगम ऑडिटोरियम में 19 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय शिक्षा अंजोर भारत द्वारा आयोजित स्व. श्री हरिवंश मिश्र राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह एवं शैक्षिक संगोष्ठी-2026 में भी भुनेश्वरी मंथन को सम्मानित किया गया।
आयोजन में देशभर से शिक्षा जगत से जुड़े शिक्षक, शिक्षाविद् एवं गणमान्यजन शामिल हुए। चयन के आधार में शिक्षकों का समर्पण, नवाचारपूर्ण शिक्षण पद्धतियां, शैक्षिक गतिविधियों में सहभागिता तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में योगदान जैसे पहलुओं को प्रमुखता दी गई।
संगोष्ठी में शिक्षा की वर्तमान चुनौतियों, नवाचारपूर्ण शिक्षण, विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। इसके बाद चयनित शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान प्रदान किया गया।
26 सितंबर को फिर मिला ‘एजुकेशन स्कल्प्टर अवार्ड–2026’

सम्मानों की यह श्रृंखला 26 सितंबर 2026 को रायपुर में आयोजित समारोह तक पहुंची, जहां एम.डी. एजुकेशन सोसाइटी, सरायपाली द्वारा भुनेश्वरी मंथन को पुनः ‘एजुकेशन स्कल्प्टर अवार्ड–2026’ से सम्मानित किया गया। शिक्षा के क्षेत्र में उनके निरंतर कार्य, प्रयोगधर्मी दृष्टिकोण और नवाचारों को मिली यह मान्यता उनके शैक्षिक सफर की महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
सम्मान से अधिक महत्वपूर्ण है विद्यार्थियों के भविष्य की नींव
श्रीमती भुनेश्वरी मंथन की उपलब्धियों का महत्व केवल पुरस्कारों की संख्या में नहीं, बल्कि उस कार्यपद्धति में है जिसके माध्यम से उन्होंने शिक्षा को बच्चों की जिज्ञासा, प्रतिभा और रचनात्मकता से जोड़ने का प्रयास किया है। उनके नवाचारों का विभिन्न शैक्षिक प्रकाशनों में प्रकाशित होना इस बात का संकेत है कि कक्षा-कक्ष में किए जा रहे प्रयोग अब व्यापक शैक्षिक संवाद का हिस्सा बन रहे हैं।
लगातार मिले सम्मानों से खरसिया क्षेत्र में भी हर्ष का वातावरण है। स्थानीय स्तर पर इसे शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहे शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
अपनी इन उपलब्धियों का श्रेय श्रीमती भुनेश्वरी मंथन ने अपने स्कूल स्टाफ, ग्राम के गणमान्य नागरिकों और अपने परिवार को दिया है। उनका कहना है कि किसी शिक्षक की वास्तविक सफलता सम्मान मंच पर नहीं, बल्कि तब दिखाई देती है जब उसके प्रयास से किसी विद्यार्थी की आंखों में सीखने का उत्साह और भविष्य का सपना जन्म लेता है।
सम्मानों की चमक कुछ समय की होती है, लेकिन शिक्षा से रोशन किए गए जीवन की रोशनी पीढ़ियों तक चलती है।

प्रधान पाठक
शा प्रा शाला पामगढ़, ब्लॉक खरसिया,
श्रीमती भुनेश्वरी मंथन की यह यात्रा इसी स्थायी रोशनी की एक प्रेरक कहानी बनकर सामने आई है।




