खरसिया–धरमजयगढ़ यात्री ट्रेन कब चलेगी?

कोयला ढुलाई वर्षों से जारी,अब यात्रियों को रेल सेवा का इंतजार…
खरसिया। खरसिया–धरमजयगढ़ रेल कॉरिडोर को लेकर क्षेत्रवासियों की वर्षों पुरानी उम्मीद अब एक सीधे सवाल में बदल गई है—जब इस रेल लाइन पर कोयले की ढुलाई हो रही है,तो यात्री ट्रेन आखिर कब चलेगी? रेल संपर्क के नाम पर जिस परियोजना को क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास की महत्वपूर्ण कड़ी बताया गया था,उसका लाभ आम यात्रियों को अब तक नियमित यात्री सेवा के रूप में नहीं मिल पाया है।

आधिकारिक परियोजना विवरण के अनुसार खरसिया–धरमजयगढ़ रेल कॉरिडोर का उद्देश्य केवल कोयला परिवहन तक सीमित नहीं है,बल्कि यात्री सेवाओं को भी सुविधा प्रदान करना है। परियोजना का पहला चरण 124.80 किलोमीटर का है और इसमें खरसिया–धरमजयगढ़ मुख्य रेल संपर्क के साथ विभिन्न कोयला क्षेत्रों को जोड़ने वाली लाइनें शामिल हैं।
पटरी तैयार,मालगाड़ियां दौड़ रहीं, यात्री ट्रेन का इंतजार
इस रेल कॉरिडोर पर माल परिवहन लंबे समय से शुरू हो चुका है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार खरसिया–कोरिच्छापार खंड पर अक्टूबर 2019 में पहली मालगाड़ी चलाई गई थी। इसके बाद कोरिच्छापार–धरमजयगढ़ खंड को भी जून 2021 में मालगाड़ियों के संचालन के लिए स्वीकृति मिली।
यानी इस क्षेत्र में रेल पटरी का उपयोग कोयला और माल ढुलाई के लिए लगातार होता रहा है। प्रधानमंत्री द्वारा सितंबर 2023 में पूर्वी रेल कॉरिडोर के पहले चरण को राष्ट्र को समर्पित किए जाने के बाद भी इसका प्रमुख उपयोग माल परिवहन और कोयला निकासी के लिए ही सामने आता है।
सवाल सुविधा का नहीं,प्राथमिकता का है
खरसिया,घरघोड़ा,छाल,कूडुमकेला और धरमजयगढ़ सहित आस-पास के क्षेत्र लंबे समय से रेल यात्री सेवा की उम्मीद लगाए बैठे हैं। सड़क मार्ग से यात्रा करने वाले ग्रामीणों,विद्यार्थियों,नौकरीपेशा लोगों,व्यापारियों और मरीजों के लिए यदि इसी रेल लाइन पर यात्री ट्रेन उपलब्ध होती है, तो रायगढ़ और खरसिया जैसे बड़े केंद्रों तक आवागमन आसान और अपेक्षाकृत किफायती हो सकता है।
विडंबना यह है कि जिस क्षेत्र से बड़ी मात्रा में कोयला देश के बिजली घरों और औद्योगिक इकाइयों तक पहुंचाया जा रहा है,उसी क्षेत्र के लोगों को अपने दैनिक आवागमन के लिए सड़क परिवहन पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
कोयले की रफ्तार के साथ यात्री सेवा का सवाल
रेल कॉरिडोर की आधिकारिक जानकारी में स्वयं Passenger Services को परियोजना के उद्देश्यों में शामिल किया गया है। ऐसे में अब क्षेत्रवासियों की मांग को केवल भावनात्मक अपेक्षा नहीं माना जा सकता। सवाल यह है कि यात्री सेवा शुरू करने के लिए रेलवे की ओर से क्या प्रक्रिया बाकी है,परिचालन संबंधी क्या बाधाएं हैं और पहली यात्री ट्रेन चलाने की संभावित समय सीमा क्या है?
फिलहाल उपलब्ध ताजा आधिकारिक सूचनाओं में खरसिया–धरमजयगढ़ मार्ग पर नियमित यात्री ट्रेन शुरू करने की कोई निश्चित तारीख घोषित दिखाई नहीं देती। इसलिए किसी संभावित तारीख को अंतिम मानना उचित नहीं होगा।
स्थानीय विकास का अधूरा अध्याय
खरसिया–धरमजयगढ़ रेल परियोजना का मूल उद्देश्य क्षेत्र के कोयला संसाधनों को रेल नेटवर्क से जोड़ना और माल परिवहन को मजबूत करना था,लेकिन परियोजना के आधिकारिक विवरण में यात्री सेवाओं को भी लक्ष्य बनाया गया है।
अब आवश्यकता इस बात की है कि रेलवे,राज्य सरकार और परियोजना से जुड़े संबंधित संस्थान स्पष्ट करें कि यात्री ट्रेन शुरू करने की वास्तविक स्थिति क्या है। यदि तकनीकी, परिचालन या सुरक्षा संबंधी औपचारिकताएं बाकी हैं तो उनकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए और यदि सभी तैयारियां पूरी हैं तो यात्री सेवा की समयसीमा घोषित की जानी चाहिए।
क्षेत्रवासियों की मांग—कोयला ढुलाई के साथ जनता के लिए भी ट्रेन
क्षेत्रवासियों की भावना को एक वाक्य में कहा जाए तो मांग सीधी है—“जिस पटरी पर वर्षों से कोयला दौड़ रहा है, उसी पटरी पर अब आम आदमी की ट्रेन भी दौड़नी चाहिए।”
रेल परियोजना का वास्तविक सामाजिक लाभ तभी दिखाई देगा, जब उससे केवल खनिज परिवहन की क्षमता न बढ़े, बल्कि स्थानीय लोगों की आवाजाही, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार को भी गति मिले।
अब जरूरत आश्वासन की नहीं, स्पष्ट समयसीमा की है—खरसिया–धरमजयगढ़ यात्री ट्रेन आखिर कब चलेगी?




