
खरसिया। डिजिटल दुनिया जितनी सुविधाओं से भरी है, उतनी ही अदृश्य चुनौतियों से भी घिरी हुई है। एक अनजान लिंक,एक संदिग्ध कॉल या लालच भरा संदेश कभी-कभी मासूम जिज्ञासा को बड़ी परेशानी में बदल सकता है। ऐसे समय में जागरूकता ही वह कवच है,जो तकनीक के संसार में बच्चों और परिवारों को सुरक्षित रख सकती है।
इसी उद्देश्य को लेकर छत्तीसगढ़ पुलिस के “साइबर जागृति अभियान” के तहत खरसिया पुलिस ने सेंट जॉन्स स्कूल में व्यापक साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें करीब 2100 विद्यार्थियों और शिक्षकों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाया गया। 15 अगस्त से 02 अक्टूबर 2026 तक चल रहे इस अभियान के बीच एक ही कार्यक्रम में इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों तक पहुंचना खरसिया पुलिस के जागरूकता प्रयास का उल्लेखनीय पड़ाव रहा।
बच्चों को बताया—साइबर दुनिया में सावधानी ही सुरक्षा

कार्यक्रम में एसडीओपी खरसिया सतीश भार्गव ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी रास्ता जागरूकता है। उन्होंने बच्चों को सुरक्षित इंटरनेट व्यवहार अपनाने, अनजान कॉल और लिंक से सावधान रहने तथा किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की स्थिति में अभिभावकों और शिक्षकों से सलाह लेने की बात कही।
उनकी बात का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह रहा कि साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं,बल्कि रोजमर्रा की आदतों से जुड़ा हुआ अनुशासन है। जिस तरह सड़क पार करते समय सावधानी जरूरी है, उसी तरह डिजिटल दुनिया में भी हर क्लिक से पहले ठहरकर सोचना आवश्यक है।
निरीक्षक त्रिनाथ त्रिपाठी ने 2100 विद्यार्थियों से किया सीधा संवाद

चौकी प्रभारी खरसिया निरीक्षक त्रिनाथ त्रिपाठी ने विद्यार्थियों से सीधे संवाद करते हुए साइबर अपराध के बदलते तौर-तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी अब केवल आर्थिक ठगी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बच्चों और युवाओं को ऑनलाइन गेमिंग,फर्जी ऑफर,संदिग्ध लिंक, सोशल मीडिया पर अजनबियों से संपर्क और लालच भरे संदेशों के माध्यम से भी निशाना बना रहे हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को सरल लेकिन महत्वपूर्ण संदेश दिया—अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले रुकें,सोचें और जरूरत पड़ने पर अपने माता-पिता या शिक्षक से सलाह लें।
ऑनलाइन गेमिंग की लत और उससे उत्पन्न मानसिक दबाव को लेकर भी विद्यार्थियों को सावधान किया गया। डिजिटल दुनिया में कुछ क्षणों की असावधानी किस तरह लंबे समय की परेशानी का कारण बन सकती है, पुलिस ने इसे उदाहरणों के माध्यम से समझाया।
एक बच्चा जागरूक हुआ तो पूरा परिवार सुरक्षित होगा– सीता राम ध्रुव

कार्यक्रम की सबसे भावनात्मक और रचनात्मक पहल “जागरूकता की एक सेल्फी” रही। विद्यार्थियों को प्रेरित किया गया कि वे अपने अभिभावकों के साथ साइबर जागरूकता की सेल्फी लेकर सुरक्षा का संदेश सोशल मीडिया के माध्यम से आगे बढ़ाएं।
इसके पीछे सोच सिर्फ तस्वीर लेने तक सीमित नहीं है। एक जागरूक बच्चा अपने घर में माता-पिता, भाई-बहन और बुजुर्गों को भी डिजिटल ठगी के प्रति सावधान कर सकता है। इस तरह स्कूल में बोला गया एक संदेश घर की चौखट पार कर समाज तक पहुंच सकता है।
अभियान को मिला व्यापक जनभागीदारी का आधार
एसएसपी शशि मोहन सिंह के दिशा-निर्देशन में रायगढ़ पुलिस जिले के स्कूलों,कॉलेजों और विभिन्न संस्थानों में साइबर जागरूकता कार्यक्रम चला रही है। प्रतिदिन एक हजार से अधिक बच्चों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाने के लक्ष्य के बीच खरसिया में 2100 विद्यार्थियों तक पहुंचा यह कार्यक्रम अभियान के विस्तार को दर्शाता है।
दरअसल,साइबर अपराध की चुनौती केवल पुलिस के सामने खड़ी समस्या नहीं है। यह परिवार,विद्यालय और समाज—तीनों की साझा जिम्मेदारी है। तकनीक से दूरी इसका समाधान नहीं, बल्कि तकनीक का विवेकपूर्ण और सुरक्षित इस्तेमाल ही इसका रास्ता है।

कार्यक्रम में एसडीओपी खरसिया सतीश भार्गव,थाना प्रभारी खरसिया निरीक्षक सीताराम ध्रुव,चौकी प्रभारी निरीक्षक त्रिनाथ त्रिपाठी,आरक्षक साबिल चन्द्रा सहित थाना एवं चौकी का स्टाफ उपस्थित रहा। विद्यार्थियों ने साइबर अपराधों से बचाव के उपाय समझे और जागरूकता का संदेश अपने परिवार तथा समाज तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

साइबर दुनिया में सुरक्षा किसी पासवर्ड से शुरू होकर जागरूकता पर खत्म नहीं होती—यह हर क्लिक, हर बातचीत और हर ऑनलाइन निर्णय में सावधानी का नाम है। खरसिया के 2100 विद्यार्थियों तक पहुंचा यह संदेश यदि उनके घरों तक पहुंचता है,तो यह कार्यक्रम केवल एक जागरूकता अभियान नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के लिए डिजिटल सुरक्षा की नई शुरुआत बन सकता है।


