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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने नई दिल्ली में एनबीईएमएस के 23वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

स्वस्थ भारत ही विकसित भारत 2047 की नींव है: जेपी नड्डा

चिकित्सा शिक्षा एक विशेषाधिकार है और समाज के प्रति उत्तरदायित्व भी है: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री

वर्ष 2029 तक स्नातक और स्नातकोत्तर की 75,000 और सीटें जोड़ी जाएंगी, जिनमें से चिकित्सा शिक्षा में 23,000 सीटें पिछले दो वर्षों में पहले ही दी जा चुकी हैं

एनबीईएमएस के 23वें दीक्षांत समारोह के दौरान 26,396 उम्मीदवारों को डीएनबी, DrNB, डिप्लोमा और एफएनबी की योग्यताएं प्रदान की गईं

उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए एनबीईएमएस के 137 शीर्ष छात्रों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने एनबीईएमएस के 23वें दीक्षांत समारोह में 11 नए शैक्षणिक पाठ्यक्रम और वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन (ओएनओएस) पहल का शुभारंभ किया

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दिल्ली।केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री  जगत प्रकाश नड्डा ने आज नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान परीक्षा बोर्ड (एनबीईएमएस) के 23वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। एनबीईएमएस भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त निकाय है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि दीक्षांत समारोह महज़ डिग्री प्रदान करने का समारोह नहीं है, बल्कि उन छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के समर्पण, दृढ़ता और कड़ी मेहनत का उत्सव है, जिन्होंने स्नातक होने वाले चिकित्सा पेशेवरों की इस सफलता में अमूल्य योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि यह अवसर स्नातक होने वाले उम्मीदवारों से जुड़े हर परिवार, मार्गदर्शक और संस्थान के लिए गौरव का क्षण है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि देश के उभरते विशेषज्ञों को सम्मानित करके भारत अपनी स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था के भविष्य को आकार दे रहा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इन युवा डॉक्टरों की विशेषज्ञता, नवाचार और प्रतिबद्धता देश की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का समाधान करने और देश भर में स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणालियों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत 2047 के विज़न पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि स्वस्थ भारत ही एक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र की नींव है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बेहतर स्वास्थ्य, राष्ट्रीय प्रगति और सतत् विकास का एक प्रमुख स्तंभ है और एक मजबूत स्वास्थ्य सेवा प्रणाली आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए बेहद ज़रुरी है।

उन्होंने इस बात पर बल दिया कि स्वास्थ्य सेवा केवल भौतिक अवसंरचना के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कुशल और दयावान डॉक्टरों को तैयार करना भी शामिल है, जो स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की रीढ़ हैं। उन्होंने कहा, “नीति निर्माताओं के रूप में, हम अवसंरचना और प्रणालियों को बेहतर बना सकते हैं, लेकिन अगर इमारतें हार्डवेयर हैं, तो डॉक्टर स्वास्थ्य सेवा का वास्तविक सॉफ्टवेयर हैं।”

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने संतोष व्यक्त किया कि एनबीईएमएस की योग्यताएं चिकित्सा शिक्षा में गुणवत्ता, उत्कृष्टता और विश्वास के प्रतीक के रूप में उभरी हैं। उन्होंने कहा कि एनबीईएमएस का नाम आज रोगी देखभाल और पेशेवर उत्कृष्टता के प्रति समर्पित उच्च योग्य चिकित्सा विशेषज्ञों को तैयार करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है।

इस मौके पर उन्होंने एनबीईएमएस द्वारा शुरू किए गए 11 नए शैक्षणिक पाठ्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि ये कार्यक्रम रोगी देखभाल को बेहतर बनाने, विशेष स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और समाज को समग्र रूप से लाभ पहुंचाने में बेहद अहम योगदान देंगे। एनबीईएमएस पाठ्यक्रम संचालित करने वाले संस्थानों में ‘वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन’ (ओएनओएस) पहल के कार्यान्वयन की प्रशंसा करते हुए, उन्होंने छात्रों और संकाय सदस्यों के लिए शैक्षणिक संसाधनों और सीखने के अवसरों की व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एनबीईएमएस को बधाई दी।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने दोहराया कि एनबीईएमएस कुशल और समर्पित स्वास्थ्य पेशेवरों को तैयार करके देश में चिकित्सा शिक्षा और क्षमता निर्माण को मजबूत करने में लगातार महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।



पिछले एक दशक में चिकित्सा शिक्षा के परिवर्तनकारी विस्तार पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के गतिशील नेतृत्व में भारत ने स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था और चिकित्सा संस्थानों में अभूतपूर्व वृद्धि देखी है। उन्होंने कहा कि जहां 20वीं शताब्दी के अंत तक देश में केवल एक एम्स था, वहीं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में छह अतिरिक्त एम्स स्थापित किए गए। तब से, 16 नए एम्स स्थापित किए गए हैं, जिससे देश भर में इनकी कुल संख्या 23 हो गई है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार अब सभी एम्स संस्थानों को, एम्स नई दिल्ली के मानकों के अनुरूप मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है, साथ ही इन प्रमुख संस्थानों को देश भर के अन्य मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य संस्थानों को मार्गदर्शन देने में सक्षम बना रही है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने जानकारी देते हुए कहा कि देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 818 हो गई है, जबकि स्नातक चिकित्सा सीटों की संख्या लगभग 1.28 लाख तक पहुंच गई है। इसी प्रकार, स्नातकोत्तर चिकित्सा सीटों की संख्या लगभग 31,000 से बढ़कर करीब 85,000 हो गई है। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगले पांच वर्षों में स्नातक और स्नातकोत्तर चिकित्सा सीटों में 75,000 की वृद्धि की घोषणा की है, जिनमें से करीब 23,000 सीटें पिछले दो वर्षों में ही सृजित की जा चुकी हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्नातक और स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और गुणवत्ता मानकों को बढ़ाने के लिए 2026 से 2029 की अवधि के लिए लगभग 15,000 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने ज़ोर देते हुए कहा कि चिकित्सा शिक्षा केवल एक अधिकार नहीं है, बल्कि सरकार, शिक्षकों, संस्थानों और समाज के संयुक्त प्रयासों से संभव हुआ एक विशेषाधिकार है। उन्होंने स्नातक डॉक्टरों से करुणा, ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ समाज की सेवा करने का आग्रह किया।

युवा विशेषज्ञों को चिकित्सा शिक्षण और अकादमिक क्षेत्र में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने कहा कि छात्रों को अपने पूरे पेशेवर जीवन में लगातार सीखने के प्रति प्रतिबद्ध रहना चाहिए। उन्होंने चिकित्सा अभ्यास और रोगी देखभाल में प्रभावी संचार कौशल के महत्व पर भी जोर दिया।

समग्र स्वास्थ्य सेवा के नज़रिए की ज़रुरत पर जोर देते हुए, उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य प्रणाली का ध्यान उपचारात्मक देखभाल के साथ-साथ निवारक और संवर्धक स्वास्थ्य सेवाओं की ओर भी ज्यादा केंद्रित होना चाहिए। खास तौर पर गैर-संक्रामक रोगों (एनसीडी) के बढ़ते मामलों का ज़िक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि जीवनशैली से जुड़े कारक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों के रूप में उभर रहे हैं। लिहाज़ा स्वास्थ्य पेशेवरों को नागरिकों के बीच जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली को सक्रिय रूप से बढ़ावा देने की ज़रुरत है।

उन्होंने स्नातक डॉक्टरों से अपने करियर के दौरान हमेशा सीखने की भावना और बौद्धिक जिज्ञासा को बनाए रखने का आग्रह करते हुए अपने संबोधन का समापन किया और कहा कि चिकित्सा पेशे में उत्कृष्टता के लिए आजीवन सीखना ज़रुरी है।

रायगढ़ कारीछापर कि बेटी डाक्टर मीना पटेल गोल्ड मेडल प्राप्त कर जिले का मान बढ़ाई


दीक्षांत समारोह देश भर के हजारों डॉक्टरों के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक और व्यावसायिक उपलब्धि थी, जिन्होंने एनबीईएमएस द्वारा संचालित विभिन्न स्नातकोत्तर और पोस्टडॉक्टोरल चिकित्सा कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक पूरा किया।

समारोह के दौरान, 26,396 योग्य उम्मीदवारों को उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता, नैदानिक दक्षता और व्यावसायिक क्षमता के सम्मान में डीएनबी, DrNB, डिप्लोमा और एफएनबी की उपाधियाँ प्रदान की गईं। असाधारण योग्यता और उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन को मान्यता देते हुए, एनबीईएमएस की अंतिम परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विभिन्न विशिष्टताओं के 137 शीर्ष छात्रों को व्यक्तिगत रूप से स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।

कार्यक्रम के दौरान, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने देश भर में विशिष्ट चिकित्सा शिक्षा को और मजबूत करने तथा गुणवत्तापूर्ण रोगी देखभाल को बढ़ावा देने के मकसद से 11 नए शैक्षणिक पाठ्यक्रमों का शुभारंभ भी किया।

इस अवसर पर सरकार द्वारा अनुमोदित ‘वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन’ (ओएनओएस) पहल का भी शुभारंभ किया गया, जो आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की परिकल्पना के अनुरूप है। इस पहल का मकसद छात्रों, संकाय सदस्यों और शोधकर्ताओं को उच्च स्तरीय शोध लेखों, पत्रिकाओं और अकादमिक प्रकाशनों तक राष्ट्रव्यापी पहुंच प्रदान करना है, जिससे गुणवत्तापूर्ण अकादमिक संसाधनों तक समान पहुंच को बढ़ावा मिले और चिकित्सा शिक्षा में अनुसंधान तंत्र को मजबूती मिले।



इस कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव, एनबीईएमएस के अध्यक्ष डॉ. अभिजात शेठ, एनबीईएमएस के संकाय सदस्य, छात्र और अभिभावक उपस्थित थे।

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Gopal Krishna Naik

Editor in Chief Naik News Agency Group

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