
खरसिया। कुर्रुभांठा से बड़े जामपाली, दर्रामुड़ा, बिंजकोट और गिण्डोला क्षेत्र को जोड़ने वाली सड़क की बदहाली को लेकर ग्रामीणों की नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। बारिश के दौरान गड्ढों,कीचड़ और जलभराव से आवागमन प्रभावित होने के बीच ग्रामीण अब सड़क निर्माण और मरम्मत को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।
ग्रामीण युवाओं का कहना है कि सड़क को लेकर वे संबंधित जिम्मेदार अधिकारी से मुलाकात करने खरसिया कार्यालय पहुंचे थे। युवाओं के मुताबिक,उन्होंने पहले मोबाइल पर मुलाकात की अनुमति ली और सड़क की समस्या को लेकर चर्चा की। बातचीत के दौरान युवाओं ने कथित तौर पर यह सवाल उठाया कि यदि पूरी सड़क का निर्माण तत्काल संभव नहीं है तो पहले से बनी सड़क को आधा-अधूरा तोड़कर ग्रामीणों की परेशानी क्यों बढ़ाई गई?

युवाओं के अनुसार, इस पर अधिकारी ने कथित रूप से कहा कि “मैंने थोड़े ही तोड़ा है, बनवा सकते हो तो जाकर बनवा लेना।” कुर्रुभांठा स्टेट हाईवे 200 से स्कूल तक महज 100-150 मीटर सड़क के लिए युवाओं ने औद्योगिक प्रतिष्ठान से निर्माण सामग्री उपलब्ध कराने में सहयोग की बात रखी तो अधिकारी द्वारा कथित तौर पर औद्योगिक घराने से इस संबंध में बात करने से इनकार किया गया। बातचीत आगे बढ़ने के बजाय जब मामला नोक झोंक होने लगा,युवाओं का आरोप है कि उन्हें चेंबर से बाहर जाने के लिए कहा गया।

इस पूरे घटनाक्रम से ग्रामीण युवा नाराज बताए जा रहे हैं। उनका कहना है कि वे किसी विवाद के लिए नहीं, बल्कि क्षेत्र की महत्वपूर्ण सड़क की समस्या लेकर अधिकारी के पास गए थे। उनका सवाल है कि जनता की सड़क से जुड़ी समस्या उठाने पर यदि संवाद का रास्ता भी बंद हो जाए तो ग्रामीण आखिर अपनी बात किसके सामने रखें?
गांधी चौक–फगुरम सड़क आंदोलन की याद
सड़क को लेकर खरसिया क्षेत्र में पहले भी जनआंदोलन देखने को मिल चुके हैं। गांधी चौक से फगुरम होते हुए डभरा-सक्ती जिले को जोड़ने वाली सड़क की बदहाली के दौरान भी सड़क निर्माण को लेकर समय समय-समय पर आंदोलन हुआ था।
उस समय सड़क की समस्या को लेकर तत्कालीन भाजपा-कांग्रेस युवा नेतृत्व से जुड़े,विधायक उमेश पटेल,प्रदेश के वर्तमान वित्त मंत्री ओ पी चौधरी,पार्टीजन को रायगढ़ चौक में धरना-प्रदर्शन दोनों पार्टियों समय समय पर करना पड़ा था।
अब ग्रामीणों के बीच सवाल उठ रहा है कि क्या कुर्रुभांठा से बड़े जामपाली, दर्रामुड़ा, बिंजकोट और गिण्डोला तक सड़क की स्थिति भी किसी बड़े आंदोलन का रूप लेगी? क्षेत्र के युवाओं और ग्रामीणों की नाराजगी को देखते हुए आने वाले दिनों में इस मुद्दे के राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर उठने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
आरोपों पर जिम्मेदार पक्ष का जवाब जरूरी
ग्रामीणों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। खासतौर पर सड़क निर्माण,सड़क तोड़े जाने,कार्य की जिम्मेदारी और औद्योगिक प्रतिष्ठानों की भूमिका से जुड़े तथ्यों पर संबंधित विभाग और ठेकेदार का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण है। यदि सड़क निर्माण किसी तकनीकी,प्रशासनिक या अनुबंध संबंधी कारण से प्रभावित है तो उसकी स्थिति भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
ग्रामीणों का सीधा सवाल है कि आखिर सड़क निर्माण को लेकर ऐसी स्थिति क्यों बनी हुई है कि आम लोगों को आवागमन की परेशानी उठानी पड़ रही है और समस्या उठाने पहुंचे युवाओं को भी कथित तौर पर संतोषजनक जवाब नहीं मिल पा रहा है?

अब निगाह इस बात पर है कि संबंधित विभाग,ठेकेदार और प्रशासन इस सड़क को लेकर क्या स्पष्ट जवाब देते हैं और ग्रामीणों की समस्या के समाधान के लिए जमीन पर कब तक ठोस पहल होती है।



