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खरसिया: अटल राॅक गार्डन बोतल्दा के झरने में जान जोखिम में डाल रहे लोग, विभागीय निर्देशों की उड़ रही धज्जियां …

खरसिया। बारिश के मौसम में बोतल्दा स्थित अटल राॅक गार्डन का झरना एक बार फिर लोगों की भीड़ से गुलजार है। बड़ी संख्या में युवक और पर्यटक झरने के तेज बहाव में उतरकर स्नान और सेल्फी का जोखिम उठा रहे हैं। चिंताजनक बात यह है कि सुरक्षा संबंधी विभागीय निर्देशों और संभावित खतरे के बावजूद इस पर प्रभावी रोक दिखाई नहीं दे रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि वन विभाग और संबंधित प्रशासन की ओर से ऐसे स्थानों पर सावधानी बरतने की हिदायतें समय-समय पर जारी की जाती रही हैं, लेकिन मौके पर इन निर्देशों का पालन कराने के लिए पर्याप्त निगरानी नजर नहीं आती। परिणामस्वरूप लोग खुलेआम प्रतिबंधों की अनदेखी कर अपनी और दूसरों की जान जोखिम में डाल रहे हैं।

बारिश के दौरान झरनों का जलस्तर अचानक बढ़ना, फिसलन भरी चट्टानें और तेज बहाव किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। प्रदेश के विभिन्न जिलों में ऐसे कई हादसे सामने आ चुके हैं, जहां एक छोटी-सी लापरवाही ने परिवारों की खुशियां छीन लीं।स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि समय रहते सख्ती नहीं बरती गई तो बोतल्दा का यह पर्यटन स्थल भी किसी बड़े हादसे का गवाह बन सकता है। उनका कहना है कि केवल चेतावनी बोर्ड लगाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा कर्मियों की तैनाती, बैरिकेडिंग और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई भी आवश्यक है।
वन विभाग और प्रशासन की जिम्मेदारी केवल निर्देश जारी करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन भी उतना ही आवश्यक है। वहीं आम नागरिकों की भी जिम्मेदारी है कि वे रोमांच के नाम पर अपनी जान जोखिम में न डालें।

स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि समय रहते सख़्ती नहीं बरती गई तो बोतल्दा का यह पर्यटन स्थल भी किसी बड़े हादसे का गवाह बन सकता है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि केवल चेतावनी बोर्ड लगाने से काम नहीं चलेगा,बल्कि संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा कर्मियों की तैनाती,बैरिकेडिंग और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही भी आवश्यक है।
वन विभाग और प्रशासन की जिम्मेदारी केवल निर्देश जारी करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन भी उतना ही आवश्यक है। वहीं आम नागरिकों की भी जिम्मेदारी है कि वे रोमांच के नाम पर अपनी जान जोखिम में न डालें।

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जरूरत इस बात की है कि किसी अनहोनी के बाद कार्यवाही करने के बजाय पहले से ही प्रभावी रोकथाम सुनिश्चित की जाए,ताकि किसी घर का चिराग बुझने से बचाया जा सके और एक संभावित हादसे को समय रहते टाला जा सके।

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Gopal Krishna Naik

Editor in Chief Naik News Agency Group

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