
✍गुरुदेव राठौर @खरसिया-रायपुर। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने 25 अगस्त को प्रस्तावित ‘टीईटी मुक्ति रैली’ को शिक्षक संवर्ग की एकजुटता का बड़ा अवसर बताते हुए प्रदेशभर के शिक्षकों से इसमें शामिल होने की अपील की है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा और प्रदेश महामंत्री गुरुदेव राठौर ने विज्ञप्ति जारी कर कहा कि शिक्षक संवर्ग को अपने आपसी भेद से ऊपर उठकर सामूहिक अधिकारों और सुरक्षित सेवा के लिए संघर्ष करना होगा।
एसोसिएशन ने कहा कि 17 अगस्त 2012 से पहले नियुक्त शिक्षकों की भर्ती और पदोन्नति के नियमों में टीईटी की अनिवार्यता नहीं थी। संगठन के अनुसार, ऐसी स्थिति में इन शिक्षकों पर टीईटी को लेकर दबाव बनाना, टीईटी को पदोन्नति से जोड़ना अथवा टीईटी के अभाव में सेवा समाप्ति जैसे मुद्दे गंभीर हैं। संगठन ने शिक्षकों की सुरक्षित सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए इनका पुरजोर विरोध किया है।
पेंशन और सेवा अवधि का मुद्दा भी उठाया
विज्ञप्ति में पेंशन को भी शिक्षक संघर्ष का महत्वपूर्ण विषय बताया गया है। एसोसिएशन ने कहा कि 2028 से पहले सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों तथा 2028 के बाद सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के पेंशन संबंधी भविष्य को लेकर गंभीर चिंता है। संगठन ने सवाल उठाया कि सेवानिवृत्ति के बाद शिक्षकों के जीवन-यापन और चिकित्सा खर्च की व्यवस्था कैसे होगी।
एसोसिएशन ने 1998 से 2018 तक की सेवा को मान्यता देने की मांग भी उठाई। संगठन का कहना है कि इस अवधि की सेवाओं को शासकीय सेवा के रूप में मान्यता नहीं मिलने के कारण शिक्षक संवर्गों में वेतन संबंधी विसंगतियां बनी हुई हैं। संगठन ने शिक्षकों के लिए केंद्रीय वेतनमान लागू करने की मांग को भी प्रमुख मुद्दा बताया।
नए भर्ती-पदोन्नति नियम पर आपत्ति
एसोसिएशन ने 13 फरवरी 2026 को लागू किए गए नए भर्ती एवं पदोन्नति नियम पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन का दावा है कि नए नियमों में शिक्षक संवर्ग के पदोन्नति संबंधी अवसरों और अधिकारों में कटौती की गई है।
विज्ञप्ति में कहा गया कि पूर्व में शिक्षक एवं प्रधान पाठक से एबीओ, व्याख्याता एवं प्राचार्य से बीईओ तथा प्राचार्य से उपसंचालक जैसे पदों पर पदोन्नति के प्रावधान रहे हैं। संगठन ने इन अवसरों को शिक्षक संवर्ग के हित से जोड़ते हुए नए प्रावधानों पर पुनर्विचार की मांग की है।
बीएड की अनिवार्यता पर भी सवाल
एसोसिएशन ने शिक्षक और व्याख्याता पद के लिए बीएड की अनिवार्यता को लेकर भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। संगठन का कहना है कि यदि शिक्षकों के लिए बीएड अनिवार्य किया जा रहा है तो सेवा में रहते हुए प्रशिक्षण की व्यवहारिक व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
संगठन ने बताया कि बीएड प्रशिक्षण को ब्रिज कोर्स के रूप में संचालित करने के संबंध में शिक्षा विभाग से व्यापक चर्चा की गई है। एसोसिएशन ने उम्मीद जताई कि इस दिशा में आने वाले समय में सकारात्मक निर्णय हो सकता है।
‘आठ साल के विभाजन से अपेक्षित परिणाम नहीं मिले’
विज्ञप्ति में शिक्षक संवर्ग के भीतर पिछले वर्षों में पैदा हुए वर्गीय विभाजन का भी उल्लेख किया गया है। संगठन ने कहा कि वर्षों तक शिक्षक एकजुट होकर शासन के सामने अपनी मांगें रखते रहे, लेकिन पिछले करीब आठ वर्षों में संवर्गीय विभाजन के बावजूद अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए।
एसोसिएशन ने अपने पूर्व प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि तत्कालीन प्रमुख सचिव शिक्षा डॉ. आलोक शुक्ला के साथ तथ्यात्मक और तार्किक चर्चा के बाद ‘वन टाइम रिलैक्सेशन’ के तहत करीब 30 हजार शिक्षकों की पदोन्नति कराने में संगठन को सफलता मिली।
सभी संवर्गों से रैली में शामिल होने की अपील
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने कहा कि 25 अगस्त की ‘टीईटी मुक्ति रैली’ केवल एक वर्ग की मांग नहीं, बल्कि शिक्षक संवर्ग के व्यापक हितों से जुड़े मुद्दों को सामने रखने का अवसर है। संगठन ने सहायक शिक्षक, शिक्षक, प्रधान पाठक, व्याख्याता और प्राचार्य सहित सभी संवर्गों से रैली में शामिल होने का आह्वान किया है।

संजय शर्मा और गुरुदेव राठौर ने कहा कि शिक्षक हितों की लड़ाई को संवर्गीय भेद से ऊपर उठकर सामूहिक रूप से लड़ना होगा। संगठन ने शिक्षकों से पांच प्रमुख मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए 25 अगस्त की रैली को शिक्षक एकता और अधिकारों के लिए संघर्ष का शंखनाद बनाने की अपील की है।
— छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन की विज्ञप्ति के आधार पर




