
खरसिया। हमालपारा (शीतल नगर) स्थित प्रसिद्ध शीतला माता मंदिर के हिस्से में कथित तौर पर तोड़-फोड़ किए जाने का मामला सामने आया है। घटना के बाद मोहल्लेवासियों में आक्रोश है। स्थानीय लोगों ने पुलिस चौकी खरसिया में लिखित शिकायत देकर मंदिर को नुकसान पहुंचाने वाले व्यक्तियों के साथ ही संबंधित ठेकेदार और अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही की मांग की है।
शिकायत के अनुसार,बुधवार शाम करीब 03 बजे चार व्यक्ति शीतला माता मंदिर के हिस्से को तोड़ रहे थे। इसकी जानकारी मिलने पर मोहल्लेवासी मौके पर पहुंचे और कथित रूप से मंदिर तोड़ रहे लोगों को रोक दिया।

स्थानीय लोगों द्वारा जब उनसे मंदिर में तोड़-फोड़ किए जाने का कारण पूछा गया तो उन्होंने कथित तौर पर बताया कि वे ठेकेदार नरेंद्र साहू के कहने पर यह कार्य कर रहे थे।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मंदिर शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है और वहां की संरचना को नुकसान पहुंचने से लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। घटना के बाद क्षेत्र में नाराजगी का माहौल है तथा स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि यदि मामले में समय रहते कार्यवाही नहीं हुई तो स्थिति तनावपूर्ण हो सकती है।

मोहल्लेवासियों ने पुलिस से पूरे मामले की जांच कर मंदिर में तोड़-फोड़ करने वाले व्यक्तियों के साथ कथित रूप से निर्देश देने वाले ठेकेदार तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करने की मांग की है।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि मामले में तत्काल उचित कार्यवाही नहीं की गई तो नगरवासियों द्वारा आंदोलन किया जाएगा। शिकायतकर्ताओं ने संभावित अप्रिय स्थिति के लिए शासन-प्रशासन को जिम्मेदार ठहराने की बात कही है।
कलमकारों ने रखी अपनी मत

क्षेत्र के कलमकारों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में प्रशासन को पारदर्शिता के साथ वस्तुस्थिति स्पष्ट करनी चाहिए,

ताकि अफवाहों की जगह तथ्य सामने आएं और सामाजिक सौहार्द बना रहे।

“कलम किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था में जवाबदेही के पक्ष में खड़ी है।

आस्था के केंद्र की गरिमा की रक्षा करना प्रशासन,निर्माण एजेंसी और समाज—सभी की साझा जिम्मेदारी है।”
कलमकारों ने प्रशासन से मांग की है कि मंदिर परिसर का निरीक्षण कर क्षति का आकलन कराया जाए, दोषी पाए जाने वालों पर नियमानुसार कार्यवाही की जाए…

और भविष्य में किसी भी विकास कार्य के दौरान धार्मिक एवं सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

अब पूरे मामले में पुलिस जांच और मौके पर मौजूद परिस्थितियों के आधार पर यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि मंदिर के हिस्से को किस अनुमति अथवा आदेश के तहत तोड़ा जा रहा था और इसमें संबंधित ठेकेदार अथवा अधिकारियों की वास्तविक भूमिका क्या थी। पुलिस की जांच के बाद ही आरोपों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।




