प्रधानमंत्री मोदी समेत कई नेताओं ने दलाई लामा को 91वें जन्मदिन पर दी शुभकामनाएं

प्रधानमंत्री मोदी समेत कई नेताओं ने दलाई लामा को 91वें जन्मदिन पर दी शुभकामनाएं
बौद्ध धर्मगुरु 14वें दलाई लामा के 91वें जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला समेत कई केंद्रीय मंत्रियों और नेताओं ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। नेताओं ने उनके लंबे एवं स्वस्थ जीवन की कामना करते हुए शांति, करुणा और मानवता के प्रति उनके योगदान की सराहना की।
पीएम मोदी ने बताया प्रेरणा का स्रोत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर शुभकामना संदेश साझा करते हुए कहा कि दलाई लामा का शांति और सद्भाव का संदेश पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि उनकी नैतिक और आध्यात्मिक शक्ति तथा वैश्विक कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता प्रशंसनीय है। प्रधानमंत्री ने उनके दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना भी की।
ओम बिरला और किरेन रिजिजू ने भी दीं शुभकामनाएं
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि करुणा, शांति और मानवीय गरिमा के प्रति दलाई लामा का आजीवन समर्पण दुनिया भर के लाखों लोगों को प्रेरित करता है। उन्होंने उनके उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की कामना की। वहीं, केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि 14वें दलाई लामा के मूल्य और आदर्श पूरी मानवता को प्रेम, शांति और करुणा का मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने उनके लंबे और स्वस्थ जीवन के लिए प्रार्थना की।
ज्योतिरादित्य सिंधिया और सीआर पाटिल ने किया सम्मान व्यक्त
केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि करुणा, सद्भाव और शांति के लिए दलाई लामा का आजीवन समर्पण मानवता के लिए मार्गदर्शक बना हुआ है। उन्होंने उनके अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना की। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा कि करुणा, अहिंसा, शांति और मानवीय मूल्यों के प्रति दलाई लामा का समर्पण विश्वभर के लोगों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने विश्वास जताया कि उनका आध्यात्मिक नेतृत्व आने वाली पीढ़ियों का भी मार्गदर्शन करता रहेगा।
1959 में भारत आए थे दलाई लामा
6 जुलाई 1935 को तिब्बत के तक्तसेर गांव में जन्मे 14वें दलाई लामा तेनजिन ग्यात्सो तिब्बती समुदाय के आध्यात्मिक और लौकिक नेता हैं। तिब्बती परंपरा के अनुसार, उन्हें दो वर्ष की आयु में 13वें दलाई लामा का पुनर्जन्म माना गया था। वर्ष 1959 में तिब्बत छोड़ने के बाद वे भारत आए और 1960 से हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में रह रहे हैं, जिसे ‘लिटिल ल्हासा’ के नाम से भी जाना जाता है।




