
एक तरफ ग्रामीणजनों के आंदोलन उपरांत भालुनारा-नवागांव-राबर्टसन सड़क निर्माण नहीं हो पा रहा है वही उपरोक्त सड़क का दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है …
राबर्टसन,राबर्टसन– बड़े डूमरपाली–भालूनारा मार्ग से संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध नहीं कराए जाने का मामला अब छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग तक पहुंच गया है। नवीन दर्शन ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत द्वितीय अपील/शिकायत प्रस्तुत करते हुए पहली अपील के आदेश के बावजूद सूचना उपलब्ध नहीं कराए जाने पर आवश्यक कार्यवाही की मांग की है।

आवेदक के अनुसार उन्होंने उक्त सड़क से संबंधित संपूर्ण फाइल एवं नोटशीट की प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करने के लिए आरटीआई आवेदन प्रस्तुत किया था। निर्धारित अवधि में सूचना नहीं मिलने पर प्रथम अपील दायर की गई। इसके बाद प्रथम अपीलीय अधिकारी एवं अधीक्षण अभियंता, लोक निर्माण विभाग,बिलासपुर मंडल द्वारा अपील प्रकरण को जन सूचना अधिकारी को सात दिवस के भीतर संपूर्ण फाइल एवं नोटशीट की प्रमाणित प्रतियां निःशुल्क उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया।

आवेदक का कहना है कि आदेश में निर्धारित सात दिवस की अवधि बीत जाने के बाद भी उन्हें मांगी गई सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। इसी को आधार बनाकर उन्होंने 17 अगस्त 2026 को राज्य सूचना आयोग, छत्तीसगढ़, नवा रायपुर के समक्ष द्वितीय अपील/शिकायत प्रस्तुत की है।
आदेश के अनुपालन पर उठे सवाल
मामले का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सूचना उपलब्ध कराने के लिए प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की गई थी। इसके बावजूद सूचना नहीं मिलने का आरोप सामने आने से आरटीआई अधिनियम के तहत अधिकारियों द्वारा प्रथम अपील के आदेश के अनुपालन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

रॉबर्टसन– बड़े डूमरपाली–भालूनारा मार्ग से जुड़े दस्तावेजों को लेकर पहले से ही क्षेत्र में चर्चा और सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में संबंधित फाइल और नोटशीट की प्रमाणित प्रतियां सार्वजनिक होने से सड़क से जुड़े प्रशासनिक निर्णय, प्रस्ताव,स्वीकृति और निर्माण प्रक्रिया से संबंधित तथ्य स्पष्ट हो सकते हैं।

अब द्वितीय अपील के माध्यम से मामला राज्य सूचना आयोग के समक्ष पहुंचने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आयोग सूचना उपलब्ध कराने के संबंध में क्या निर्देश देता है और प्रथम अपीलीय आदेश के कथित अनुपालन न होने पर जिम्मेदारी तय करने की दिशा में क्या कदम उठाए जाते हैं।
आरटीआई का मूल उद्देश्य ही सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। ऐसे में प्रथम अपील के आदेश के बाद भी सूचना लंबित रहने का मामला केवल एक आवेदक की शिकायत नहीं, बल्कि सूचना के अधिकार के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़ा प्रश्न बन गया है।




