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घरेलू हिंसा पर चुप्पी नहीं, साहस से करें मुकाबला

घरेलू हिंसा केवल शारीरिक प्रताड़ना तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक, आर्थिक और भावनात्मक उत्पीड़न भी इसके दायरे में आता है। भय, सामाजिक दबाव या बदनामी की आशंका के कारण अक्सर पीड़ित महिलाएं आवाज उठाने से हिचकती हैं, जिससे समस्या और गंभीर हो जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि हिंसा के खिलाफ समय रहते कदम उठाना न केवल पीड़ित की सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि भविष्य में होने वाले बड़े अपराधों को भी रोक सकता है। कानून महिलाओं को सम्मानपूर्वक और सुरक्षित जीवन जीने का अधिकार देता है, इसलिए किसी भी प्रकार की प्रताड़ना को सामान्य मानकर सहन करना समाधान नहीं है।

छत्तीसगढ़ पुलिस ने महिलाओं से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की घरेलू हिंसा, उत्पीड़न या धमकी की स्थिति में तत्काल सहायता लें। पुलिस और संबंधित एजेंसियां पीड़ितों को सुरक्षा, कानूनी सहायता और आवश्यक परामर्श उपलब्ध कराने के लिए तत्पर हैं।

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संदेश स्पष्ट है— “चुप्पी अत्याचार को बढ़ावा देती है, जबकि आवाज न्याय की राह खोलती है।”

🚨 आपातकालीन सेवा: 112
☎️ महिला हेल्पलाइन: 1091

आप अकेली नहीं हैं, सहायता आपके एक कॉल की दूरी पर है।

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Gopal Krishna Naik

Editor in Chief Naik News Agency Group

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