नए पोस्टमार्टम रूम से बढ़ेगी संवेदनशील स्वास्थ्य व्यवस्था की पहचान: प्रवीण तिवारी
खरसिया। किसी भी परिवार के लिए अपने प्रियजन को खोने का क्षण जीवन की सबसे पीड़ादायक परिस्थितियों में से एक होता है। ऐसे समय में यदि व्यवस्था भी असुविधा और अव्यवस्था का कारण बन जाए, तो दुःख और अधिक गहरा हो जाता है। खरसिया सिविल हॉस्पिटल में लंबे समय से पोस्टमार्टम की प्रक्रिया एक छोटे,जर्जर और अपर्याप्त कमरे में संचालित होती थी, जिससे न केवल चिकित्सकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, बल्कि शोकाकुल परिजनों को भी धूप,बारिश और अन्य असुविधाओं के बीच इंतजार करना पड़ता था।
इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) मद से आधुनिक सुविधाओं से युक्त नए पोस्टमार्टम रूम का निर्माण कराया गया है। इस अवसर पर आग खरसिया अनुविभागीय अधिकारी राजस्व,जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष प्रवीण तिवारी ने कहा कि पूर्व में पोस्टमार्टम सिविल हॉस्पिटल की छत पर स्थित एक छोटे से कमरे में किया जाता था, जिसकी स्थिति अत्यंत दयनीय थी। सीमित स्थान और पर्याप्त सुविधाओं के अभाव में डॉक्टरों को भी कठिन परिस्थितियों में कार्य करना पड़ता था।
उन्होंने कहा कि प्रशासन ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए रायगढ़ कलेक्टर के माध्यम से डीएमएफ फंड से राशि स्वीकृत कराई, जिसके परिणामस्वरूप यह सर्वसुविधायुक्त पोस्टमार्टम रूम तैयार हो सका। उनका मानना है कि इससे न केवल चिकित्सकीय प्रक्रियाएं अधिक व्यवस्थित होंगी, बल्कि परिजनों को भी कठिन समय में अनावश्यक परेशानियों से राहत मिलेगी।
सिविल हॉस्पिटल के उन्नयन पर भी जोर
अनुविभागीय अधिकारी राजस्व खरसिया प्रवीण तिवारी ने बताया कि सिविल हॉस्पिटल खरसिया, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र चपले के समग्र जीर्णोद्धार और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का कार्य भी जारी है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में जहां कहीं भी कमियां शेष हैं, उन्हें दूर करने के लिए जिला प्रशासन से अतिरिक्त संसाधनों और फंड की मांग की जाएगी, ताकि खरसिया क्षेत्रवासियों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं अपने नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्रो में उपलब्ध हो सकें।
संवेदनशील प्रशासन का उदाहरण
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में केवल चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि मरीजों और उनके परिजनों की गरिमा एवं सुविधा का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है। नया पोस्टमार्टम रूम इसी सोच का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है, जहां तकनीकी आवश्यकता के साथ मानवीय संवेदनाओं को भी प्राथमिकता दी गई है।
कार्यक्रम में चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, नगरपालिका अध्यक्ष,पार्षद, अधिकारी-कर्मचारी,जनभागीदारी समिति के सदस्य तथा क्षेत्र के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। यह पहल स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करने के साथ-साथ नागरिक सुविधाओं के प्रति प्रशासनिक संवेदनशीलता का भी प्रतीक बनकर उभरी है।



