केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री ने एनसीआर में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर जनभागीदारी का आह्वान किया

पहली बार आयोजित अनोखे संवाद में एनसीआर के 63 शहरों के महापौर और स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि एकजुट हुए तथा साफ हवा की शपथ ली

वायु प्रदूषण नियंत्रण और प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक एवं डेटा-आधारित दृष्टिकोण जमीनी स्तर तक पहुंचाना आवश्यक; जनप्रतिनिधि नेतृत्वकारी भूमिका निभाएं: भूपेन्द्र यादव
दिल्ली।केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आज राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर व्यापक जनभागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने महापौरों और शहरी स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों से स्वच्छ वायु मिशन को आगे बढ़ाने में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने का आग्रह किया। इस संवाद में NCR के 63 शहरों के महापौरों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया। वायु प्रदूषण के मुद्दे पर निर्वाचित स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों के साथ मंत्रालय द्वारा आयोजित इस तरह के बड़े पैमाने पर संवाद का यह पहला अवसर है।

मंत्री यादव ने इस बात पर जोर दिया कि वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक और डेटा-आधारित दृष्टिकोण जमीनी स्तर तक पहुंचना चाहिए, जिसमें जनप्रतिनिधि कार्ययोजनाओं को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने में केन्द्रीय भूमिका निभाएं। उन्होंने महापौरों और स्थानीय प्रतिनिधियों को उदाहरण प्रस्तुत करते हुए नेतृत्व करने तथा नागरिकों को अनावश्यक प्रदूषण रोकने और स्वच्छ एवं स्वस्थ शहरी वातावरण सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शहरी स्थानीय निकाय प्रथम प्रत्युत्तरदाता हैं और मार्गदर्शन के साथ किए गए प्रयासों से व्यापक बदलाव ला सकते हैं। इसलिए इस मुद्दे पर उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
शहरी क्षेत्रों के तेजी से विस्तार और इसके परिणामस्वरूप ठोस अपशिष्ट की समस्या को रेखांकित करते हुए मंत्री ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 तथा निर्माण एवं विध्वंस (C&D) अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2025 को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से वायु प्रदूषण नियंत्रण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में स्थानीय निकायों की शक्तियों और जिम्मेदारियों से भली-भांति परिचित होने तथा नागरिकों के लिए अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करने हेतु पहले सकारात्मक कदम उठाने का आह्वान किया।
मंत्री यादव ने स्थानीय निकायों से सड़कों के किनारे स्थानीय और सूखा-रोधी घास की प्रजातियां लगाकर हरित आवरण बढ़ाने का आग्रह किया, ताकि धूल से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिल सके। उन्होंने प्रभावी सफाई सुनिश्चित करने, प्लास्टिक के उपयोग और बायोमास जलाने की रोकथाम तथा मानकों के अनुरूप न चलने वाले उद्योगों और वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण में जनभागीदारी के लिए अधिक अवसर उपलब्ध कराने का भी आह्वान किया।



