दिल्ली

अवैध और जहरीली शराब का गढ़ बना गुजरात, हाईकोर्ट के जज से कराई जाए जांच -कांग्रेस

नई दिल्ली। पीएम मोदी के गढ़ कहे जाने वाले गुजरात में हाल ही में अवैध एवं जहरीली शराब कांड से लगभग 45 से अधिक लोगों की मौत हो गई। इस मामले को लेकर कांग्रेस ने गुजरात में कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए पीएम मोदी सहित गुजरात की भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला। कांग्रेस ने गुजरात में जहरीली शराब पीने से कई लोगों की मौत की घटना को लेकर आज कहा कि इस मामले की जांच राज्य उच्च न्यायालय के किसी वर्तमान न्यायाधीश से कराई जानी चाहिए।

पार्टी के मीडिया एवं प्रचार प्रमुख पवन खेड़ा ने यह आरोप भी लगाया कि गुजरात में भाजपा सरकार के संरक्षण में नशे का कारोबार हो रहा है। उन्होंने कहा कि तथाकथित शराबबंदी वाले गुजरात में जहरीली शराब पीने की वजह से 45 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है और 100 से ज्यादा लोग जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह जानकारी सामने आई है कि बोटाद जिले में 600 लीटर ‘मिथाइल अल्कोहल’ (मेथेनॉल) अहमदाबाद से लाया गया था। उसके बाद इसमें पानी मिलाकर जिले के विभिन्न इलाकों में बेच दिया गया जिसके सेवन से या तो लोगों की जान चली गई या उनके गुर्दे खराब हो गए।
खेड़ा ने कहा कि एक ड्राई स्टेट में इतना सब कुछ हो जाए और स्थानीय पुलिस-प्रशासन को भनक तक नहीं लगे, यह संभव नहीं है। जरूर इसके पीछे सत्ताधारी दल के नेता, पुलिस-प्रशासन और शराब माफियाओं की मिलीभगत रही होगी। यह सिर्फ आरोप नहीं है बल्कि इसके पीछे ठोस आधार भी है। रोजीद गांव के सरपंच लगातार प्रशासन को पत्र लिख कर बता रहे थे कि गांव में सरेआम देसी शराब की बिक्री हो रही है।

उन्होंने दावा किया कि जहरीली शराब से जिन लोगों की मौत हुई है उनके परिजनों का मीडिया में रोते हुए बयान है कि यहां कोई शराबबंदी नहीं है, खुलेआम शराब बिक रही है। यदि पूरे गुजरात की बात करें तो अवैध शराब का करीब 15,000 करोड़ रुपए का सालाना कारोबार हो रहा है। मोदी के गांव वडनगर से लेकर हर ज़िले में शराब का ग़ैर क़ानूनी धंधा फल फूल रहा है।

खेड़ा ने कहा कि इतना बड़ा मामला हुआ, करीब 50 लोगों की जान गई, 100 से ज्यादा लोग जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं लेकिन न तो गृह मंत्री, न मुख्यमंत्री और न ही प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिवारों से मुलाक़ात की, जबकि प्रधानमंत्री गुजरात में ही हैं। उन्होंने कहा कि जहरीली शराब कांड की उच्च न्यायालय के किसी वर्तमान न्यायाधीश से जांच कराई जानी चाहिए क्योंकि जिस पुलिस पर आरोप है यदि वही जांच करेगी तो जांच का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।

कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि जहरीली शराब पीने की वजह से जिन लोगों की मौत हुई है उनमें से अधिकतर गरीब थे और घर चलाने की उन पर जिम्मेदारी थी। ऐसे परिवारों को समुचित मुआवजा दिया जाए। इस कांड की वजह से जिनकी आंखें चली गई हैं या गुर्दे खराब हो गए हैं उनके लिए मुफ्त और बेहतर इलाज की व्यवस्था होनी चाहिए।गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने बुधवार को कहा था कि 25 जुलाई को प्रदेश के बोटाद में जहरीली शराब पीने के बाद बोटाद और पड़ोसी अहमदाबाद जिले में अब तक 42 लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि भावनगर, बोटाद और अहमदाबाद में कम से कम 97 लोग अस्पतालों में भर्ती हैं।

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Gopal Krishna Naik

Editor in Chief Naik News Agency Group

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