
खरसिया। क्षेत्र की ऐतिहासिक और प्राकृतिक पहचान बने रामझरना के आस-पास इन दिनों हालात को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि ऐतिहासिक धरोहर के आस-पास कथित अवैध गतिविधियां जारी हैं,लेकिन संबंधित जिम्मेदार विभागों की ओर से प्रभावी कार्यवाही नजर नहीं आ रही है।
ग्रामीणों का सीधा सवाल है कि जिस स्थान को सुरक्षित रखना और उसकी गरिमा बनाए रखना प्रशासन तथा संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है,वहां कथित अनियमितताओं पर समय रहते रोक क्यों नहीं लगाई जा रही? आखिर निगरानी व्यवस्था कहां है और जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई कब होगी?
जिम्मेदारों की भूमिका पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों के मुताबिक रामझरना जैसे महत्वपूर्ण स्थल के आस-पास यदि नियमों की अनदेखी हो रही है तो यह केवल स्थानीय स्तर की समस्या नहीं, बल्कि संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल है। लोगों का कहना है कि समय रहते कार्यवाही नहीं हुई तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन किसी बड़े विवाद या गंभीर घटना के बाद ही सक्रिय होगा?
संरक्षण के नाम पर व्यवस्था की परीक्षा
रामझरना केवल पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान नहीं है,बल्कि यह क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए इसके आस-पास किसी भी अवैध गतिविधि की शिकायत को गंभीरता से लेना जरूरी है।
ग्रामीणों का कहना है कि पर्यटन और विकास को बढ़ावा देना जरूरी है, लेकिन उसके साथ आस-पास स्थल की सुरक्षा,स्वच्छता,पर्यावरण संरक्षण और कानून-व्यवस्था को भी प्राथमिकता मिलनी चाहिए। केवल योजनाएं और दावे पर्याप्त नहीं होंगे,जब तक जमीन पर निगरानी और कार्यवाही दिखाई न दे।
ग्रामीण पूछ रहे—कानून का शिकंजा कब कसेगा?
अब ग्रामीण संबंधित विभागों से मौके पर जांच और स्पष्ट कार्यवाही की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि शिकायतों को केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित रखने के बजाय अधिकारी स्वयं मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति देखें। यदि अवैध गतिविधियां जांच में प्रमाणित होती हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही की जाए।
रामझरना के पास धान खरीदी केन्द्र में अवैध कोयला डम्प को लेकर उठ रहे सवाल अब ग्रामीणों की नाराजगी से आगे बढ़कर प्रशासनिक जवाबदेही और ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण का मुद्दा बनते जा रहे हैं।
अब निगाहें जिम्मेदार विभागों पर हैं—क्या वे ग्रामीणों की शिकायतों को गंभीरता से लेकर मौके की जांच करेंगे और कार्यवाही करेंगे या फिर रामझरना के आस-पास उठते सवालों पर भी खामोशी बनी रहेगी?




