
खरसिया।नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत के साथ ही ग्राम बरगढ़ स्थित स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय में शिक्षा, संस्कार और भविष्य के सपनों का एक सुंदर संगम देखने को मिला। विद्यालय परिसर में आयोजित ‘शाला प्रवेश उत्सव’ केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि वह क्षण बन गया जब नन्हे कदमों ने ज्ञान के मंदिर में प्रवेश कर अपने उज्ज्वल भविष्य की पहली पंक्ति लिखनी शुरू की।

रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र के सांसद राधेश्याम राठिया के मुख्य आतिथ्य में आयोजित इस समारोह में शिक्षा के प्रति समाज की प्रतिबद्धता और बच्चों के भविष्य को लेकर सामूहिक संकल्प स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। विद्यालय पहुंचते ही नवप्रवेशी विद्यार्थियों का तिलक लगाकर, मिठाई खिलाकर और आत्मीय स्नेह के साथ स्वागत किया गया। मासूम चेहरों पर झलकती उत्सुकता और अभिभावकों की आंखों में दिखाई देता विश्वास पूरे वातावरण को उत्सवमय बना रहा था।
अपने संबोधन में सांसद राठिया ने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अंचलों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना विकसित भारत की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण निवेश है। उनके शब्दों में शिक्षा वह शक्ति है जो परिस्थितियों को बदलने के साथ-साथ पीढ़ियों का भविष्य भी संवारती है।
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष शिखा रविंद्र गवेल, श्रीमती रामकुमारी राठिया, डॉ. हितेश गवेल ,खण्ड शिक्षा अधिकारी लक्ष्मी नारायण पटेल,बीआरसी प्रदीप साहु अनेक जनप्रतिनिधियों अधिकारी कर्मचारी एवं गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
वक्ताओं ने इस अवसर पर स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट शाला योजना की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी वही अवसर उपलब्ध कराना है जो बड़े शहरों के विद्यार्थियों को प्राप्त होते हैं। आधुनिक अधोसंरचना, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था, प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता और प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण के माध्यम से ये विद्यालय ग्रामीण प्रतिभाओं को नई उड़ान देने का कार्य कर रहे हैं।
दरअसल, शाला प्रवेश उत्सव केवल बच्चों के विद्यालय आने का उत्सव नहीं है, बल्कि यह उस सामाजिक विश्वास का प्रतीक है जिसमें शिक्षा को परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम माना जाता है। जब कोई बच्चा विद्यालय की चौखट पार करता है, तब उसके साथ केवल एक विद्यार्थी नहीं, बल्कि एक परिवार की उम्मीदें और समाज का भविष्य भी कक्षा में प्रवेश करता है।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय परिवार ने सभी अतिथियों, अभिभावकों एवं ग्रामीणजनों के प्रति आभार व्यक्त किया। बच्चों की खिलखिलाहट, शिक्षकों का उत्साह और समाज की सहभागिता ने यह संदेश दिया कि यदि शिक्षा को सामूहिक जनआंदोलन का स्वरूप मिले, तो ग्रामीण भारत की प्रतिभाएं भी राष्ट्रीय क्षितिज पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर सकती हैं।


