खरसियाछत्तीसगढ़रायगढ़

बारिश से पहले नदियों का सीना छलनी, अवैध खनन माफिया बेखौफ; जिम्मेदार तंत्र पर उठे सवाल

खरसिया/रायगढ़। मानसून की दस्तक से पहले क्षेत्र की नदियां और जलधाराएं एक बार फिर अवैध खनन की मार झेल रही हैं। नदी तटों पर भारी मशीनों और वाहनों की आवा-जाही से प्राकृतिक संसाधनों का दोहन खुले आम जारी है, जबकि जिम्मेदार विभागों की निष्क्रियता पर ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

क्षेत्र के विभिन्न नदी घाटों में नियमों को ताक पर रख कर रेत और खनिजों का उत्खनन किए जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बारिश शुरू होने से पहले अधिकतम मुनाफा कमाने की होड़ में खनन माफिया दिन-रात सक्रिय हैं। नदी की धाराओं को मोड़ने, तटों को क्षतिग्रस्त करने और पर्यावरणीय संतुलन बिगाड़ने जैसी गतिविधियां भी देखी जा रही हैं।

कार्यवाही के दावे,जमीनी हकीकत अलग

खनिज,राजस्व और संबंधित विभाग समय-समय पर कार्यवाही के दावे जरूर करते हैं,लेकिन जमीनी स्तर पर अवैध खनन का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। सवाल यह है कि यदि विभागीय निगरानी प्रभावी है,तो फिर अवैध उत्खनन करने वालों के हौसले इतने बुलंद कैसे हैं?

ग्रामीणों का कहना है कि जिन घाटों पर खनन प्रतिबंधित है,वहां भी रात के अंधेरे से लेकर दिन के उजाले तक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। इससे शासन को राजस्व की हानि तो हो ही रही है, साथ ही नदी तंत्र और भू-जल संरचना पर भी दीर्घकालिक दुष्प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ रही है।

पर्यावरण और जनहित पर दोहरी चोट

विशेषज्ञों के अनुसार, अनियंत्रित रेत खनन से नदी की प्राकृतिक संरचना प्रभावित होती है। इससे कटाव बढ़ता है, जलस्तर नीचे जाता है और बाढ़ के दौरान खतरे कई गुना बढ़ सकते हैं। बारिश के मौसम में यही अव्यवस्था गांवों और कृषि भूमि के लिए संकट का कारण बन सकती है।

बड़ा सवाल

जब अवैध खनन की गतिविधियां खुले आम दिखाई दे रही हैं, तब जिम्मेदार विभागों की टीम आखिर क्या कर रही है? क्या कार्यवाही केवल कागजों तक सीमित है,या फिर कुछ प्रभावशाली तत्वों के संरक्षण में प्राकृतिक संसाधनों की यह लूट जारी है?

मानसून से पहले प्रशासन के लिए यह परीक्षा की घड़ी है। यदि समय रहते कठोर कार्यवाही नहीं हुई,तो न केवल नदियों का अस्तित्व संकट में पड़ेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के दावे भी सवालों के घेरे में आ जाएंगे। क्षेत्रवासी अब जवाब और कार्यवाही दोनों चाहती है।

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Gopal Krishna Naik

Editor in Chief Naik News Agency Group

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