
खरसिया। श्री नारायणी कुंज सेवा ट्रस्ट, श्रीवास परिवार,चपले ग्राम वासी,क्षेत्र वासी द्वारा आयोजित श्री हनुमंत कथा अपने विश्राम दिवस की ओर अग्रसर है। वर्षों से श्रद्धा, सेवा और सनातन संस्कारों की अविरल धारा बन चुकी यह कथा केवल धार्मिक आयोजन भर नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने, संस्कारों को संजोने और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरी है।
इस वर्ष का पुरुषोत्तम मास में आयोजन इसलिए भी विशेष है क्योंकि श्रीधाम अयोध्या की पूज्य साध्वी राधा किशोरी जी के श्रीमुख से कथा अमृत का रसास्वादन कर रहे हैं।
क्षेत्र के श्रद्धालुओं का यह आत्मीय संबंध अब 15 वर्षों की सफल यात्रा पूर्ण कर 16वें वर्ष में प्रवेश करने जा रहा है। यह केवल वर्षों की गणना नहीं, बल्कि विश्वास,आस्था और आध्यात्मिक निकटता की वह यात्रा है जिसने हजारों लोगों के जीवन को धर्म, सेवा और सदाचार के मार्ग से जोड़ा है।

विश्राम दिवस पर आयोजित होने वाली महा आरती श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी। दीपों की अलौकिक ज्योति, भक्ति के स्वर और सामूहिक प्रार्थना का यह दृश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक चेतना का प्रतीक होगा। जब विभिन्न वर्गों, आयु समूहों और सामाजिक पृष्ठभूमियों से जुड़े लोग एक साथ खड़े होकर आरती में सहभागी बनते हैं, तब वहां भेद नहीं, बल्कि एकता का प्रकाश दिखाई देता है।

आज के समय में जब समाज अनेक प्रकार की चुनौतियों और विभाजनों का सामना कर रहा है, ऐसे आयोजन सामाजिक समरसता के जीवंत उदाहरण बनते हैं। कथा पंडाल में न कोई बड़ा होता है और न छोटा, न कोई जाति का भेद दिखाई देता है और न ही आर्थिक स्थिति का। सभी श्रद्धालु एक ही पंक्ति में बैठकर कथा श्रवण करते हैं, एक ही भोजन प्रसाद ग्रहण करते हैं और एक ही भाव से प्रभु का स्मरण करते हैं। यही सनातन संस्कृति का वास्तविक स्वरूप है, जहां समाज को जोड़ना ही धर्म का सर्वोच्च उद्देश्य माना गया है।
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साध्वी राधा किशोरी जी निरंतर अपने प्रवचनों में यह संदेश देती रही हैं कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवता, करुणा, सेवा, परस्पर सम्मान और सामाजिक उत्तरदायित्व का भी नाम है। उनके कथा वचनों ने न केवल श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान की है, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध भी कराया है।
बेटियों पर हो रहे अत्याचारों पर जताई चिंता, वीर शहीदों को किया नमन

श्री हनुमंत कथा के दौरान पूज्य साध्वी राधा किशोरी जी ने अपने ओजस्वी एवं भावपूर्ण प्रवचन में वर्तमान समय में बेटियों के साथ बढ़ रहे अत्याचारों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि किसी भी सभ्य समाज की पहचान उसकी मातृशक्ति और बेटियों के सम्मान से होती है। जहां नारी सुरक्षित नहीं, वहां संस्कृति और संस्कार भी सुरक्षित नहीं रह सकते।
साध्वी जी ने अपने उद्बोधन में राष्ट्र की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों और अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि मातृभूमि की रक्षा हेतु अपने प्राणों का उत्सर्ग करने वाले वीर सपूत सदैव राष्ट्र की चेतना में अमर रहेंगे। उनके त्याग, पराक्रम और समर्पण के कारण ही देश सुरक्षित और गौरवान्वित है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि समाज में बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और संस्कारों की रक्षा के साथ-साथ राष्ट्रभक्ति एवं शहीदों के बलिदान के प्रति कृतज्ञता का भाव भी सदैव जीवित रखना चाहिए। कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर वीर शहीदों को नमन किया और समाज में सकारात्मक परिवर्तन का संकल्प लिया।
श्रीवास परिवार ने क्षेत्र में धार्मिक और सामाजिक चेतना के जिस दीप को वर्षों पूर्व प्रज्ज्वलित किया था, वह आज एक विशाल प्रकाशपुंज का रूप ले चुका है। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि यदि संकल्प सेवा का हो और उद्देश्य समाजहित का,तो समय के साथ वह जनआंदोलन का स्वरूप धारण कर लेता है।

कथा विश्राम दिवस के अवसर पर श्रीवास परिवार ने क्षेत्रवासियों से आग्रह किया है कि वे स्वयं कथा स्थल पर पहुंचें तथा अपने पड़ोसियों, मित्रों और परिजनों को भी साथ लेकर आएं। यह केवल कथा श्रवण का निमंत्रण नहीं, बल्कि उस तपस्या रूपी कथा अमृत में सहभागी बनने का आह्वान है, जो मन को संस्कारित, विचारों को परिष्कृत और समाज को एकसूत्र में पिरोने का कार्य कर रही है।
महा आरती के साथ जब भक्ति की यह धारा अपने विश्राम दिवस का पड़ाव तय करेगी, तब उसके पीछे केवल धार्मिक स्मृतियां ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना और मानवीय मूल्यों की वह अमूल्य विरासत भी होगी, जो आने वाले वर्षों तक समाज को दिशा देती रहेगी।



