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राजनीति से ऊपर रिश्तों का संदेश: चपले की व्यासपीठ पर दिखा उमेश पटेल का सहज व्यक्तित्व

खरसिया। राजनीति के गलियारों में प्रतिद्वंद्विता, मतभेद और आरोप-प्रत्यारोप सामान्य बात मानी जाती है, लेकिन कुछ क्षण ऐसे भी आते हैं जब सार्वजनिक जीवन के व्यक्तित्व अपने आचरण से यह सिद्ध कर देते हैं कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति विरोध नहीं, बल्कि संवाद, सम्मान और मानवीय संबंधों में निहित है। ग्राम चपले में आयोजित सात दिवसीय श्री हनुमंत कथा के दौरान ऐसा ही एक भावपूर्ण दृश्य देखने को मिला, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।

खरसिया विधानसभा क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक उमेश पटेल कथा स्थल पहुंचे और व्यासपीठ से आशीर्वाद ग्रहण किया। इस दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे महेश साहु का हाथ थामा और उन्हें सम्मानपूर्वक अपने साथ व्यासपीठ की ओर लेकर गए। यह दृश्य केवल एक औपचारिकता नहीं था, बल्कि सार्वजनिक जीवन में सौहार्द, विनम्रता और परस्पर सम्मान का जीवंत उदाहरण बन गया।

राजनीति में अक्सर प्रतिद्वंद्विता व्यक्तिगत दूरी का रूप ले लेती है, किंतु विधायक उमेश पटेल ने अपने व्यवहार से यह संदेश दिया कि विचारों की भिन्नता संबंधों की कटुता का कारण नहीं बननी चाहिए। क्षेत्र के लोगों के प्रति उनका आत्मीय जुड़ाव पहले भी कई अवसरों पर दिखाई देता रहा है। चुनावी दौर में जब प्रत्याशी रहे महेश साहु स्वास्थ्य कारणों से हाॅस्पिटल में भर्ती थे, तब उनका कुशलक्षेम जानने स्वयं पहुंचना भी इसी मानवीय संवेदनशीलता का परिचायक माना गया था।

चपले की पावन धरा पर घटित यह प्रसंग इसलिए भी विशेष रहा क्योंकि सार्वजनिक मंचों पर राजनीतिक विरोधियों को साथ लेकर चलने का साहस और उदारता विरले ही देखने को मिलती है। यह उस नेतृत्व की पहचान है, जो पद और प्रतिष्ठा के शिखर पर पहुंचकर भी अहंकार से दूर रहता है तथा समाज को जोड़ने का कार्य करता है।

विनम्रता ही नेतृत्व की सबसे बड़ी शक्ति

किसी भी जनप्रतिनिधि का वास्तविक मूल्यांकन केवल उसके राजनीतिक निर्णयों से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार, संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण से भी होता है। विधायक उमेश पटेल का यह आचरण बताता है कि जननेता वही है जो विरोधियों को भी सम्मान दे, संवाद के द्वार खुले रखे और समाज में सकारात्मक संदेश प्रसारित करे।



श्री हनुमंत कथा जैसे आध्यात्मिक आयोजन में प्रदर्शित यह सहजता और आत्मीयता उपस्थित जनसमुदाय के लिए भी प्रेरणा का विषय बनी। मंच पर दिखाई गई यह विनम्रता वस्तुतः उस संस्कार का प्रतिबिंब थी, जिसमें व्यक्ति स्वयं से पहले समाज और संबंधों को महत्व देता है।

राजनीति में मर्यादा का दुर्लभ उदाहरण

आज जब राजनीतिक विमर्श अक्सर कटुता और ध्रुवीकरण के आरोपों से घिरा रहता है, तब चपले की यह घटना मर्यादित राजनीति का एक सकारात्मक अध्याय बनकर सामने आई है। विधायक उमेश पटेल ने यह सिद्ध किया कि जननेता का कद केवल चुनावी जीत से नहीं, बल्कि उसके बड़े दिल, सहज व्यवहार और लोगों के प्रति निष्कपट स्नेह से निर्धारित होता है।

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व्यासपीठ तक साथ लेकर जाने का वह छोटा-सा दृश्य अनेक शब्दों से अधिक प्रभावशाली था। उसमें न कोई राजनीतिक प्रदर्शन था, न कोई औपचारिक संदेश, बल्कि आत्मीयता, सम्मान और मानवीय संवेदना की वह झलक थी, जिसे क्षेत्रवासी लंबे समय तक स्मरण रखेंगे।

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Gopal Krishna Naik

Editor in Chief Naik News Agency Group

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