
नीयत में हो सच्चाई और इरादों में उजास,
कुदरत स्वयं बन जाती है राहों की मधुर आस।
खरसिया। ग्राम चपले की पावन धरा इन दिनों भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना के अद्भुत संगम की साक्षी बन रही है। विगत चौदह वर्षों से श्रीमद्भागवत कथा, श्रीराम कथा एवं शिव पुराण कथा जैसे दिव्य ज्ञानयज्ञों से सतत आलोकित इस क्षेत्र में अब श्री हनुमंत कथा की अमृतधारा प्रवाहित हो रही है। श्रद्धालुओं का जनसैलाब प्रतिदिन कथा स्थल की ओर उमड़ रहा है,
जहां श्री नारायणी कुंज सेवा ट्रस्ट,श्रीधाम अयोध्या की साध्वी राधा किशोरी जी अपने मुखारविंद से भक्ति,ज्ञान और वैराग्य से परिपूर्ण शब्दामृत का रसपान करा रही हैं।

कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं होती, बल्कि वह समाज के अंतर्मन को संस्कारित करने वाली एक जीवंत पाठशाला भी होती है। चौदह वर्षों से निरंतर चल रही कथाओं की इस परंपरा ने क्षेत्र में आध्यात्मिक जागरण, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक समरसता की मजबूत नींव रखी है। अब श्री हनुमंत कथा के माध्यम से भगवान हनुमान के अद्वितीय चरित्र, उनकी सेवा, समर्पण, शक्ति और विनम्रता का संदेश जन-जन तक पहुंच रहा है।

कथा पंडाल में पहुंचने वाला प्रत्येक श्रद्धालु स्वयं को एक ऐसे वातावरण में पाता है, जहां भजन की मधुर स्वर लहरियां, वैदिक मंत्रों की गूंज और कथा के भावपूर्ण प्रसंग आत्मा को स्पर्श करते हैं। साध्वी राधा किशोरी जी की ओजस्वी एवं भावपूर्ण वाणी श्रोताओं को केवल कथा सुनाती नहीं, बल्कि उन्हें धर्म, कर्तव्य और जीवन मूल्यों के प्रति जागृत भी करती है।

धार्मिक आयोजनों की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि वे समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं। यहां न कोई बड़ा है और न छोटा, न कोई भेद है और न विभाजन। कथा स्थल पर हर व्यक्ति एक श्रद्धालु के रूप में उपस्थित होकर भक्ति के महासागर में डुबकी लगाता है। यही भारतीय संस्कृति की वह शक्ति है, जिसने सदियों से समाज को एक सूत्र में बांधकर रखा है।

श्रीवास परिवार ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में कथा श्रवण हेतु पहुंचने का आग्रह किया है। साथ ही यह भी अपील की गई है कि श्रद्धालु अपने परिवार, मित्रों एवं पड़ोसियों को भी साथ लेकर आएं, ताकि इस आध्यात्मिक अमृतवर्षा का लाभ अधिकाधिक लोग प्राप्त कर सकें।

भक्ति का यह महायज्ञ केवल कथा का आयोजन नहीं, बल्कि आत्मिक उत्थान का अवसर है। चपले की पावन भूमि पर बह रही श्री हनुमंत कथा की यह अमृतधारा श्रद्धालुओं के हृदयों में श्रद्धा, सेवा और सदाचार के नए संस्कार अंकित कर रही है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी।




