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फटी बोरियों में भविष्य की बुवाई: क्या किसानों की उम्मीदें भी ऐसे ही बिखर रहा हैं?

खरसिया। आदिवासी बाहुल्य खरसिया क्षेत्र में  मानसून की दस्तक के साथ खेतों में नई फसल की तैयारी शुरू हो चुकी है। किसान उम्मीदों की गठरी बांधकर आदिमजाति सेवा सहकारी समितियों की ओर रुख कर रहे हैं, ताकि समय पर गुणवत्तापूर्ण धान बीज प्राप्त कर सकें। लेकिन जब बीज की बोरियां ही फटी हुई मिलें और उनमें से अनाज बिखरता दिखाई दे, तब यह दृश्य केवल एक बोरी का नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता का प्रतीक बन जाता है।

अपनी बारी के लिए घंटों इंतजार करते किसान

प्राप्त तस्वीर में स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि धान बीज की बोरी बीच से फटी हुई है और बीज बाहर गिर रहा है। यह सवाल स्वाभाविक है कि यदि वितरण से पहले ही बीज की पैकिंग ऐसी स्थिति में है, तो कृषि विभाग द्वारा भंडारण,परिवहन और गुणवत्ता नियंत्रण की व्यवस्था कितनी गंभीरता से निभाई जा रही है?

बीज नहीं,किसान का विश्वास रिस रहा है

कृषि केवल उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धड़कन है। किसान जब समिति से बीज खाद प्राप्त करता है तो वह केवल धान के दाने नहीं ले जाता, बल्कि पूरे मौसम की आशा,परिश्रम और भविष्य की संभावनाएं अपने साथ लेकर जाता है। ऐसे में फटी हुई बोरियां उस भरोसे पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं, जिसे सरकारी सहकारी तंत्र मजबूत करने का दावा करता है।

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यदि बीज वितरण के शुरुआती चरण में ही ऐसी लापरवाही सामने आ रही है, तो यह आशंका भी स्वाभाविक है कि कहीं बीज की मात्रा, गुणवत्ता अथवा अंकुरण क्षमता पर भी प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

जवाबदेही तय करना आवश्यक


सहकारी समितियों का उद्देश्य किसानों को समय पर और बेहतर कृषि संसाधन उपलब्ध कराना है। इसलिए यह जानना आवश्यक है कि फटी हुई बोरियां किस स्तर पर किसानों तक पहुंचीं—भंडारण केंद्र में, परिवहन के दौरान या वितरण स्थल पर। यदि यह लापरवाही है तो जिम्मेदार अधिकारियों और आपूर्तिकर्ताओं की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

छोटी दिखने वाली समस्या,बड़ा संदेश

कई बार प्रशासन ऐसी घटनाओं को मामूली मानकर नजर अंदाज कर देता है,लेकिन कृषि व्यवस्था में छोटी लापरवाही भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। खेतों की हरियाली की शुरुआत बीज से होती है और बीज की सुरक्षा ही उत्पादन की पहली शर्त है।

फटी हुई बोरी से बिखरते धान के दाने मानो यह प्रश्न पूछ रहे हैं कि क्या किसानों के सम्मान और उनके अधिकारों की रक्षा केवल कागजों तक सीमित है? जब अन्नदाता अपने श्रम और सपनों को धरती में बोने की तैयारी कर रहा हो, तब व्यवस्था का दायित्व है कि उसे कम से कम ऐसी तस्वीरें देखने के लिए विवश न होना पड़े।

क्योंकि बोरी से गिरा हुआ बीज केवल कुछ दानों का नुकसान नहीं, बल्कि किसान के विश्वास का क्षरण भी है।

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Gopal Krishna Naik

Editor in Chief Naik News Agency Group

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