ख़बरें जरा हटकर

मांड भी गजब कर रही है…

खरसिया।मांड नदी शायद इन दिनों किसी नए ठेकेदार की भूमिका में आ गई है। देखिए न, अपना रेत समेटकर सीधे सड़क पर उंडेल दिया है। राहगीरों की सुरक्षा, वाहन चालकों की चिंता और दुर्घटनाओं का खतरा—ये सब बातें शायद उसकी प्राथमिकताओं में शामिल नहीं हैं।

सड़क के बीचों-बीच पड़ा यह रेत का ढेर मानो चिढ़ाते हुए कह रहा हो कि विकास की राह में बाधाएं केवल व्यवस्था ही नहीं, अब प्रकृति के नाम पर होने वाली लापरवाहियां भी खड़ी कर रही हैं। बरगढ़ खोला की हरियाली के बीच यह सुनहरा टीला किसी सौंदर्य का प्रतीक नहीं, बल्कि उस उदासीनता का स्मारक लगता है जो किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार करती रहती है।

मांड की धारा तो सदियों से जीवन देती आई है, लेकिन उसके आंचल से निकला यह रेत जब सड़क पर आकर राह रोकने लगे, तब सवाल नदी से कम और उन जिम्मेदार हाथों से अधिक उठते हैं जिन्होंने जनसुरक्षा को शायद भाग्य के भरोसे छोड़ दिया है। कहीं ऐसा न हो कि यह मौन पड़ा रेत का ढेर किसी परिवार की खुशियां निगलने के बाद ही हटाया जाए।

प्रकृति तो अपना काम कर रही है, पर इंसानों की लापरवाही ने उसे भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। सड़क पर पड़ा यह रेत का ढेर पूछ रहा है—“क्या किसी हादसे की खबर ही मेरे हटने का इंतजार कर रही है?”

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Gopal Krishna Naik

Editor in Chief Naik News Agency Group

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