
खरसिया। यूँ तो कार्यक्रम करने पर कहीं ना कहीं चुक हो ही जाता है समय अभाव के वज़ह से सत्ता पक्ष के कार्यकर्त्ताओं स्थानीय कलमकारों को आमंत्रण को लेकर साथ अन्य व्यवस्था को लेकर ख़ैर … गुरुवार के ढ़लती दोपहरी में आधुनिक संयुक्त तहसील भवन की सौगात खरसिया क्षेत्रवासियों को मिली। छत्तीसगढ़ शासन के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने करीब 2.75 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित दो मंजिला तहसील भवन का लोकार्पण किया। एक ही परिसर में राजस्व, न्यायालय, निर्वाचन, पंजीयन, अभिलेख और नागरिक सेवाओं से जुड़े विभिन्न कार्यालयों की व्यवस्था होने से क्षेत्र के लोगों को प्रशासनिक कार्यों के लिए बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है।
लोकार्पण समारोह की शुरुआत विधी विधान से पूजा पाठ करते फीता काटते हुए भवन का निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। वित्त मंत्री चौधरी ने परिसर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत अशोक का पौधा भी रोपा। मंचासीन होने के पूर्व छत्तीसगढ़ महतारी के समक्ष दीप प्रज्वलन,वंदे मातरम् और राजगीत के साथ हुई।कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों,अधिकारियों, अधिवक्ताओं,कर्मचारियों,गणमान्य नागरिकों और कुछ एक पत्रकार की मौजूदगी रही।
एक परिसर में सिमटीं कई प्रशासनिक सुविधाएं

नए भवन में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व एवं तहसीलदार न्यायालय व कार्यालय, नायब तहसीलदार कक्ष, कानूनगो शाखा, भू-अर्जन शाखा, निर्वाचन शाखा, भुइयां शाखा, अभिलेखागार, केंद्रीय रिकॉर्ड रूम,सेवा सेतु/लोक सेवा केंद्र, ट्रेजरी कार्यालय, सब-रजिस्ट्रार कार्यालय, खाद्य निरीक्षक एवं आपदा प्रबंधन कक्ष जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

इसके अलावा मीटिंग हॉल,निर्वाचन स्ट्रांग रूम,ट्रेजरी स्ट्रांग रूम तथा अधिवक्ताओं के लिए अलग कक्ष की व्यवस्था है। दिव्यांगजनों के लिए रैम्प और महिला-पुरुष प्रसाधन की सुविधा भी विकसित की गई है। प्रशासन का कहना है कि इससे खरसिया के साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले नागरिकों को राजस्व एवं प्रशासनिक कार्यों में सहूलियत होगी।
वित्त मंत्री चौधरी की घोषणा—खरसिया नगर के विकास के लिए पांच करोड़ रुपये अतिरिक्त

लोकार्पण समारोह में वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल घोषणाएं करना नहीं,बल्कि ऐसे कार्य करना है जिनका सीधा असर जनता के जीवन पर दिखाई दे। उन्होंने खरसिया क्षेत्र के विभिन्न विकास कार्यों के लिए नगर सरकार को पांच करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि की व्यवस्था/स्वीकृति कराने की घोषणा किए।

उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों/पार्टी के वरिष्ठजनो के साथ चर्चा कर प्राथमिकता वाले कार्य तय किए जाएंगे। कुसमुरा में निर्माणाधीन कॉलेज भवन को पूरा कराकर लोकार्पण कराने की बात भी उन्होंने कही। नगरपालिका क्षेत्र में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स,यूथ कॉम्प्लेक्स सहित अन्य विकास कार्यों का भी उन्होंने उल्लेख किया।
आरओबी बना राजनीतिक बहस का केंद्र
वित्त मंत्री ने खरसिया के निर्माणाधीन आरओबी को भी महत्वपूर्ण परियोजना बताया। उन्होंने करीब 67 करोड़ रुपये की लागत वाले आरओबी का निर्माण पूरा कर जनता को उसके उपयोग की सुविधा उपलब्ध कराना अपने सरकार की प्राथमिकता बताया।

यहीं से समारोह का राजनीतिक अर्थ राजनैतिक पंडितों द्वारा निकाला जाने लगा। विकास कार्यों को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर जनता के हित में काम करने की अपील करते हुए वित्त मंत्री ने जिस अंदाज में आरओबी का उल्लेख किया, उसे स्थानीय राजनीतिक हलकों में खासी दिलचस्पी से देखा गया। कार्यक्रम के बाद चर्चाओं का केंद्र यह भी रहा कि मंच से विकास के बहाने खरसिया विधानसभा की राजनीतिक दिशा को लेकर कोई संदेश छोड़ा गया या नहीं।
नगरपालिका अध्यक्ष कमल गर्ग के लिए इशारा?
समारोह के बाद स्थानीय राजनीतिक गलियारों में वित्त मंत्री के नगरपालिका अध्यक्ष कमल गर्ग को लेकर कही गई बातों की भी चर्चा तेज हो गई। वित्त मंत्री के संबोधन के दौरान जिस तरह नगरपालिका के विकास कार्यों की सराहना हुई, उसे कुछ राजनीतिक पर्यवेक्षक महज औपचारिक प्रशंसा के बजाय संभावित राजनीतिक संकेत के रूप में भी देख रहे हैं।
हालांकि वित्त मंत्री चौधरी की ओर से खरसिया विधानसभा को लेकर कोई प्रत्यक्ष राजनीतिक घोषणा नहीं की गई। इसलिए इसे फिलहाल स्थानीय राजनीतिक अटकल के तौर पर ही देखा जाना उचित होगा। फिर भी मंच से निकले संकेतों ने खरसिया के राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा जरूर बढ़ा दी है।
सवाल यह भी—तहसील भवन की राशि और श्रेय की राजनीति क्यों?

नए तहसील भवन के लोकार्पण के साथ एक पुराना राजनीतिक सवाल भी फिर सामने आया—2.75 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस विशाल और सर्वसुविधायुक्त भवन की स्वीकृति किस कार्यकाल में हुई और इसकी प्रक्रिया किस सरकार के दौरान आगे बढ़ी?
लोकार्पण के मंच पर इसका विस्तृत राजनीतिक संदर्भ सामने नहीं आया। ऐसे में अब स्थानीय स्तर पर भवन के निर्माण की प्रशासनिक और वित्तीय टाइमलाइन को लेकर चर्चा होना स्वाभाविक है। विकास कार्य किसी एक व्यक्ति या कार्यकाल की निजी नहीं होते, लेकिन लोकतांत्रिक राजनीति में जनता यह जानने का अधिकार रखती है कि किसी परियोजना की परिकल्पना, स्वीकृति,बजट और निर्माण किन चरणों से होकर पूरा हुआ।
भालूनारा-राबर्टसन सड़क आंदोलन पर मौन
ज्वलंत मुद्दा स्थानीय चर्चाओं में बना रहा—भालूनारा से राबर्टसन सड़क को लेकर कई दिनों तक चला सड़क आंदोलन। स्थानीय स्तर पर सड़क की स्थिति और उससे जुड़ी मांगों को लेकर लोगों ने भारी विरोध दर्ज कराया था।
ऐसे में मंच से क्षेत्र के व्यापक विकास की बात हो रही थी,नगर सरकार क्षेत्र के लिए तों तब इस सड़क से जुड़े स्थानीय सरोकारों पर कोई ठोस घोषणा क्यों नहीं हुई?
सरकारी मंच या राजनीतिक संदेश का मंच?
लोकार्पण समारोह मूलतः एक प्रशासनिक उपलब्धि का सार्वजनिक उत्सव था। आधुनिक तहसील भवन का निर्माण निश्चित रूप से खरसिया के लिए उपयोगी बुनियादी ढांचा है। लेकिन समारोह के दौरान विकास कार्यों के उल्लेख,आरओबी को लेकर टिप्पणी, नगरपालिका अध्यक्ष की प्रशंसा और विपक्षी विधायक उमेश पटेल पर अप्रत्यक्ष राजनीतिक चुटकी ने कार्यक्रम को प्रशासनिक औपचारिकता से आगे राजनीतिक चर्चा का विषय भी बना दिया।

खरसिया विधायक उमेश पटेल का नाम आरओबी सहित विकास कार्यों की बहस के संदर्भ में चर्चा में आया। अब राजनीतिक सवाल यही है कि आने वाले दिनों में विकास कार्यों का श्रेय किसे मिलता है और जनता के मुद्दों पर सत्ता-पक्ष और विपक्ष के बीच संवाद किस दिशा में जाता है।
सांसद ने गिनाई सुविधाओं की अहमियत

रायगढ़ लोकसभा सांसद राधेश्याम राठिया ने नए तहसील भवन के लिए वित्त मंत्री और जिला प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि आधुनिक और व्यवस्थित तहसील कार्यालय से आम नागरिकों के प्रशासनिक एवं राजस्व संबंधी काम आसान होंगे। जिला पंचायत अध्यक्ष शिखा रवीन्द्र गबेल ने भी भवन को क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
नगरपालिका अध्यक्ष कमल गर्ग ने इसे खरसिया के लिए उत्सव का दिन बताते हुए कहा कि नए भवन से वर्षों से चली आ रही प्रशासनिक कार्यालयों की असुविधाएं दूर होंगी। उन्होंने आरओबी, नालंदा परिसर, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और यूथ कॉम्प्लेक्स सहित विभिन्न विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री ओ पी चौधरी के तारीफों के पुल बांधते चले।
खरसिया अधिवक्ता संघ ने भी वित्त मंत्री का स्वागत किया। संघ के अनुसार आधुनिक तहसील भवन से अधिवक्ताओं के साथ-साथ राजस्व और न्यायालयीन कार्यों के लिए आने वाले नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
अब असली परीक्षा सेवा की
नया भवन बनने से प्रशासनिक ढांचा निश्चित रूप से मजबूत हुआ है, लेकिन इसकी सफलता केवल लोकार्पण समारोह या अत्याधुनिक सुविधाओं से तय नहीं होगी। असली कसौटी यह होगी कि नागरिकों को प्रमाणपत्र, नामांतरण,सीमांकन,पंजीयन,राजस्व प्रकरण और अन्य सेवाएं कितनी तेजी, पारदर्शिता और जवाबदेही से मिलती हैं।
एक ओर खरसिया नगर सरकार को पांच करोड़ रुपये के अतिरिक्त विकास कार्यों की घोषणा हुआ है,दूसरी ओर भालूनारा-राबर्टसन सड़क और अन्य स्थानीय ग्रामीण मुद्दे प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों की अगली परीक्षा होंगे।
लोकार्पण का मंच विकास का संदेश देकर खत्म हुआ,लेकिन इसके साथ उठे राजनीतिक संकेतों और जनता के सवालों की चर्चा अब शुरू हुई है।



