स्वदेशी मेले में दिखती है भारत की समृद्ध परंपरा की झलक,स्वदेशी वस्तुओं का करें उपयोग- राज्यपाल

रायपुर। राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके गत दिवस साइंस कॉलेज मैदान, रायपुर में स्वदेशी जागरण फाउंडेशन की ईकाई भारतीय विपणन विकास केन्द्र द्वारा आयोजित स्वदेशी मेले के समापन कार्यक्रम में शामिल हुई। इस मौके पर राज्यपाल सुश्री उइके ने स्वदेशी मेले में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया। साथ ही राज्यपाल ने पेंटिंग प्रदर्शनी का अवलोकन कर चित्रकारों की प्रशंसा की। चित्रकारों ने राज्यपाल को उनका स्केच भेंट किया। स्वदेशी मेला के आयोजकों द्वारा राज्यपाल को स्मृति चिन्ह तथा स्वदेशी उत्पादों की टोकरी भेंट की गई।
राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ में पाए जाने वाले लघु वनोपजों के संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि यह वनांचल में रहने वाले लोगों की आजीविका का प्रमुख साधन है और पिछले कुछ वर्षों में बदलती जीवन शैली ने वन तथा जैविक उत्पादों की ओर लोगों का रुझान बढ़ाया है। लोग प्राकृतिक उत्पादों का उपयोग कर रहे हैं और प्रदेश के सरगुजा तथा बस्तर अंचल में स्व सहायता समूह की महिलाएं वनउत्पादों से आर्थिक तरक्की के रास्ते में आगे बढ़ रही है। उन्होंने आयोजकों से प्रदेश के अन्य स्थलों में भी मेला आयोजन करने का आग्रह किया ताकि ग्रामीणों और छोटे उद्यमियों व स्व सहायता समूह की महिलाओं को भी अपने उत्पाद बेचने के पर्याप्त अवसर मिल पाए।
छत्तीसगढ़ शासन के पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने भी समापन समारोह को संबोधित किया और स्वदेशी उत्पादों की विशेषता और मेले के बारे में जानकारी दी। उल्लेखनीय है कि सात दिवसीय स्वदेशी मेले में 15 से 16 प्रांतों से आए व्यवसायियों ने 250 स्टॉल लगाए। मेले में थर्माकोल से बना भगवान जगन्नाथ का मंदिर तथा कोणार्क के सूर्य मंदिर का चक्र आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा।




