
दो बेटा एक बेटी के सर से उठा पिता का साया…
खरसिया।रायगढ़ जिले के खरसिया क्षेत्र के ग्राम झीटीपाली में खेत जुताई के दौरान किसान गोपाल राठिया की पेड़ गिरने से हुई मौत केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन की उस कठोर सच्चाई का प्रतीक है जहाँ किसान हर दिन प्रकृति, जोखिम और अनिश्चितताओं के बीच जीवन बिताता है। खेत में मेहनत करते हुए अचानक आए तेज आंधी-तूफान ने कुछ ही क्षणों में एक परिवार का सहारा छीन लिया।
गोपाल राठिया अपने खेत में ट्रैक्टर से जुताई कर रहे थे। मौसम के अचानक बदले मिजाज और तेज हवा के कारण पास का विशाल पेड़ टूटकर सीधे ट्रैक्टर पर गिर पड़ा। ग्रामीणों ने तत्काल उन्हें हाॅस्पिटल पहुंचाने का प्रयास किया, लेकिन जीवन की डोर टूट चुकी थी। यह घटना पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो गई है।

यह हादसा केवल प्राकृतिक आपदा का परिणाम नहीं, बल्कि ग्रामीण सुरक्षा व्यवस्था की सीमाओं को भी सामने लाता है। खेतों में काम करने वाले अधिकांश किसानों के पास मौसम संबंधी त्वरित चेतावनी, सुरक्षा प्रशिक्षण या आपदा जोखिम प्रबंधन जैसी सुविधाएँ नहीं होतीं। बदलते जलवायु चक्र के कारण अब आंधी, तूफान और अचानक मौसम परिवर्तन की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में इसके प्रति तैयारी अब भी बेहद कमजोर है।
कृषि केवल उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों की जीवन रेखा है। ऐसे में खेतों में काम करने वाले किसानों की सुरक्षा को केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी मानकर नहीं छोड़ा जा सकता। प्रशासन, मौसम विभाग और स्थानीय तंत्र के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है ताकि मौसम संबंधी चेतावनियाँ समय पर गांवों तक पहुंच सकें। साथ ही खेतों के आस-पास जर्जर और जोखिमपूर्ण पेड़ों की पहचान तथा समय रहते उनका प्रबंधन भी जरूरी है।
इस घटना ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा किया है कि आखिर प्राकृतिक आपदाओं में जान गंवाने वाले किसानों के परिवारों के लिए त्वरित राहत और दीर्घकालिक सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी है। आर्थिक सहायता केवल औपचारिकता नहीं होनी चाहिए, बल्कि प्रभावित परिवार के भविष्य को संभालने वाली व्यवस्था बननी चाहिए।
झीटीपाली की यह घटना आने वाले समय के लिए चेतावनी भी है। जलवायु परिवर्तन का प्रभाव अब शहरों की बहस भर नहीं रहा, बल्कि गांवों के खेतों तक पहुंच चुका है। ऐसे में किसान सुरक्षा, आपदा तैयारी और मौसम आधारित चेतावनी प्रणाली को ग्रामीण विकास की प्राथमिकता बनाना समय की आवश्यकता है।




